साउथ 24 परगना में अभिषेक बनर्जी के पार्टी कार्यालय पर प्रशासन की कार्रवाई, कथित अवैध निर्माण का हिस्सा ध्वस्त

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दक्षिण 24 परगना जिले के अमतला क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी से जुड़े पार्टी कार्यालय पर शनिवार को जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए कथित अवैध निर्माण वाले हिस्से को ध्वस्त कर दिया। प्रशासन का कहना है कि भवन का एक भाग आवश्यक स्वीकृति और मंजूरशुदा भवन नक्शे के बिना तैयार किया गया था, जिसके चलते नियमानुसार कार्रवाई की गई।

अधिकारियों के अनुसार, निर्माण को लेकर पहले शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इसके बाद संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर आवश्यक दस्तावेज और निर्माण से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। प्रशासन का दावा है कि निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कानूनी प्रक्रिया के तहत ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।

यह कार्यालय डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत स्थित है, जहां से अभिषेक बनर्जी सांसद हैं। लंबे समय से यह स्थान स्थानीय संगठनात्मक बैठकों, कार्यकर्ताओं के समन्वय और विभिन्न राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता रहा है। चुनावी अवधि के दौरान भी यहां रणनीतिक बैठकों का आयोजन किया जाता था और संगठन से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम इसी परिसर से संचालित होते रहे हैं।

कार्रवाई के दौरान पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। कार्यालय बंद होने के कारण अधिकारियों ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद परिसर में प्रवेश किया और केवल उस हिस्से को हटाया, जिसे प्रशासन ने नियमों के विपरीत निर्मित बताया। पूरे अभियान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया।

प्रशासन का कहना है कि जमीन और निर्माण से संबंधित दस्तावेजों की जांच अभी भी जारी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल उन हिस्सों पर केंद्रित रही, जिनके संबंध में आवश्यक अनुमति और स्वीकृति उपलब्ध नहीं थी। मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ाई जा रही है।

इस कार्रवाई के बाद इलाके में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी देखने को मिली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने प्रशासनिक कदम का समर्थन करते हुए इसे नियमों के पालन की दिशा में उठाया गया निर्णय बताया। वहीं, तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस कार्रवाई को लेकर अलग रुख सामने आया और इसे राजनीतिक दृष्टि से देखा गया। हालांकि प्रशासन ने अपने फैसले को पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप बताया है।

फिलहाल यह मामला प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया के दायरे में है। संबंधित दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी बिना अनुमति किए गए निर्माण के मामलों में नियमों के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।