न्यूयॉर्क के इस्कॉन मंदिर पहुंचे मोहन भागवत, बोले- कृष्ण चेतना से दुनिया में आ सकती है शांति

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RSS प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में दुनिया के पहले इस्कॉन सेंटर का दौरा किया। मंदिर में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज दुनिया में कई तरह के संघर्ष हैं। ऐसे समय में ‘कृष्ण चेतना’ शांति ला सकती है।

उन्होंने कहा कि दुनिया में भले ही अलग-अलग तरह की विविधताएं, मतभेद और संघर्ष हों, लेकिन अगर लोगों को यह समझ आने लगे कि सब कुछ कृष्ण का ही हिस्सा है, तो दुनिया में बेहतर और शांतिपूर्ण माहौल बनाया जा सकता है।

भागवत 26 सेकंड एवेन्यू स्थित उस जगह पर भी पहुंचे, जहां स्वामी प्रभुपाद ने जुलाई 1966 में इस्कॉन की स्थापना की थी। इसे मैचलैस गिफ्ट्स भी कहा जाता है। इस्कॉन इस साल अपनी स्थापना की 60वीं वर्षगांठ मना रहा है। इस्कॉन के 120 देशों में 1,300 मंदिर हैं।

भागवत के इस्कॉन मंदिर दौरे की तस्वीरें…

न्यूयॉर्क में इस्कॉन सेंटर के अधिकारियों के साथ भागवत।

मोहन भागवत ने इस्कॉन मंदिर की विजिटर बुक में साइन किया।

29 अगस्त को मैडिसन स्क्वायर में भागवत का कार्यक्रम

RSS प्रमुख 25 अगस्त को न्यूयॉर्क पहुंचे थे। वे RSS के 100 साल पूरे होने के मौके पर तीन देशों, अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन दौरे पर हैं। इस दौरान वे भारतीय समुदाय और अलग-अलग संगठनों के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने वाले हैं।

भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। यह कार्यक्रम RSS के 100 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों का हिस्सा है। अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) फोरम आयोजक है। कार्यक्रम में भागवत का संबोधन भी होगा।

61 संगठनों ने कार्यक्रम को विरोध किया, रद्द करने की मांग

भागवत के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में होने वाले कार्यक्रम का विरोध भी हो रहा है। अमेरिका के कई हिंदू संगठनों समेत 61 इंटरफेथ और धर्मनिरपेक्ष संगठनों ने कार्यक्रम के खिलाफ खुला पत्र जारी किया है।

मंगलवार को हिंदूस फॉर ह्यूमन राइट्स, इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल और इंटरफेथ सेंटर ऑफ न्यूयॉर्क समेत कई संगठनों ने न्यूयॉर्क सिटी हॉल के बाहर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इन संगठनों ने कार्यक्रम को रद्द करने की मांग की है।

न्यूयॉर्क मेयर ने कहा था- लोगों को बांटने वाली सोच के खिलाफ हूं

न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी भी कार्यक्रम को लेकर अपनी असहमति जता चुके हैं। उन्होंने RSS को ‘बांटने वाली सोच’ वाला बताया। ममदानी ने कहा कि वह RSS के इस कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि निजी तौर पर आयोजित कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार शहर प्रशासन के पास है या नहीं।

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने जारी की सुरक्षा सलाह

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने कार्यक्रम से पहले सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। संगठन ने कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों से सतर्क रहने, आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने और किसी भी तरह के विवाद से बचने की अपील की है।

HAF ने कहा कि कार्यक्रम को रोकने और रद्द कराने की कोशिशें की गई हैं। संगठन ने न्यूयॉर्क प्रशासन से कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों की सुरक्षा और उनके नागरिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

अमेरिकी आयोग ने RSS पर बैन की मांग की थी

भागवत के अमेरिका दौरे से पहले अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने RSS पर बैन लगाने की मांग की है। आयोग ने 19 अगस्त को अमेरिकी सरकार से RSS नेताओं को हाई लेवल राजनयिक सुविधाएं नहीं देने और उनसे आधिकारिक मुलाकात नहीं करने की अपील भी की।

भारत ने USCIRF की इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 20 अगस्त को आयोग को ‘पक्षपाती संस्था’ बताया था। उन्होंने कहा कि USCIRF लंबे समय से भारत को लेकर गलत और भड़काऊ बयान देता रहा है, इसलिए उसकी बातों को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।

मार्च की रिपोर्ट में RSS और RAW पर कार्रवाई की सिफारिश

USCIRF ने मार्च में अपनी सालाना रिपोर्ट में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर भी चिंता जताई थी। रिपोर्ट में RSS और RAW समेत कुछ संगठनों और लोगों पर बैन लगाने की सिफारिश की गई थी।

भारत ने रिपोर्ट को ‘विकृत और चुनिंदा’ बताते हुए खारिज कर दिया था। सरकार ने कहा था कि रिपोर्ट में ऐसे स्रोतों का इस्तेमाल किया गया है जिनकी विश्वसनीयता पर सवाल हैं और इसमें भारत की स्थिति की एकतरफा तस्वीर पेश की गई है।

2018 में भी अमेरिका गए थे भागवत

मोहन भागवत इससे पहले सितंबर 2018 में अमेरिका गए थे। उन्होंने शिकागो में 7 से 9 सितंबर 2018 तक आयोजित दूसरे वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस में हिस्सा लिया था। इस कार्यक्रम में 60 देशों से करीब 2,500 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। भागवत ने कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण दिया था।

2018 के इस दौरे की उपलब्ध रिपोर्टों में भागवत की किसी अमेरिकी राजनयिक से मुलाकात या उन्हें किसी औपचारिक राजनयिक सम्मान दिए जाने का जिक्र नहीं मिलता। उनका दौरा मुख्य रूप से वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस और उससे जुड़े कार्यक्रमों पर केंद्रित था।Description:

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क स्थित दुनिया के पहले इस्कॉन सेंटर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं को संबोधित किया और दुनिया में चल रहे अलग-अलग संघर्षों के बीच शांति के लिए कृष्ण चेतना को महत्वपूर्ण बताया।

मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया में अलग-अलग तरह की विविधताएं, मतभेद और संघर्ष मौजूद हैं। ऐसे माहौल में लोगों के बीच शांति और बेहतर समझ विकसित करने के लिए कृष्ण चेतना मददगार हो सकती है।

उन्होंने कहा कि अगर लोगों को यह समझ आने लगे कि हर चीज कृष्ण का ही हिस्सा है, तो समाज में आपसी मतभेद कम किए जा सकते हैं और दुनिया में ज्यादा शांतिपूर्ण माहौल बनाया जा सकता है।

भागवत उस स्थान पर भी पहुंचे, जहां स्वामी प्रभुपाद ने जुलाई 1966 में इस्कॉन की स्थापना की थी। 26 सेकंड एवेन्यू स्थित इस जगह को इस्कॉन के इतिहास में खास महत्व प्राप्त है। इस साल इस्कॉन अपनी स्थापना की 60वीं वर्षगांठ मना रहा है।

इस्कॉन का विस्तार अब दुनिया के कई देशों में हो चुका है। संगठन के 120 देशों में करीब 1,300 मंदिर बताए जाते हैं। न्यूयॉर्क में भागवत ने इस्कॉन सेंटर के अधिकारियों से भी मुलाकात की और विजिटर बुक में अपने विचार दर्ज किए।

मोहन भागवत 25 अगस्त को न्यूयॉर्क पहुंचे थे। वे RSS के 100 साल पूरे होने के अवसर पर अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर हैं। इस दौरान वे भारतीय समुदाय और विभिन्न संगठनों से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं।

29 अगस्त को भागवत न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम RSS के 100 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों का हिस्सा है। इसमें भागवत का संबोधन भी प्रस्तावित है।

मैडिसन स्क्वायर गार्डन में होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर अमेरिका में विरोध भी सामने आया है। कई हिंदू, इंटरफेथ और धर्मनिरपेक्ष संगठनों ने कार्यक्रम के खिलाफ खुला पत्र जारी कर इसे रद्द करने की मांग की है।

न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी भी कार्यक्रम को लेकर अपनी असहमति जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने RSS पर लोगों को बांटने वाली सोच रखने का आरोप लगाया और कहा कि वह इस कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते। हालांकि, उन्होंने निजी तौर पर आयोजित कार्यक्रम को रद्द करने के शहर प्रशासन के अधिकार को लेकर अनिश्चितता जताई।

कार्यक्रम से पहले हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने सुरक्षा संबंधी सलाह जारी की है। संगठन ने कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों से सतर्क रहने, आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने और किसी भी विवाद से बचने की अपील की है। इस बीच भागवत का इस्कॉन मंदिर दौरा उनके अमेरिका प्रवास का प्रमुख हिस्सा रहा, जहां उन्होंने शांति और कृष्ण चेतना के संदेश पर जोर दिया।