जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के सात वर्ष पूरे होने के अवसर पर पूरे केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक मजबूत कर दिया गया है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। श्रीनगर, कुलगाम, पहलगाम और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मल्टी लेयर सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। प्रमुख सड़कों, सार्वजनिक स्थानों और सरकारी परिसरों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, जबकि आने-जाने वाले लोगों और वाहनों की गहन जांच की जा रही है।
सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए जम्मू स्थित भगवती नगर बेस कैंप से अमरनाथ यात्रा को एक दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय केवल एहतियात के तौर पर लिया गया है ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित की जा सके। यात्रा मार्गों पर सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं और हालात का नियमित मूल्यांकन किया जा रहा है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से सहयोग करने और जारी निर्देशों का पालन करने की अपील भी की है।
जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग सहित कई प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा बलों ने विशेष अभियान चलाया। जगह-जगह चेकिंग पॉइंट बनाए गए, जहां वाहनों की तलाशी ली गई और यात्रियों की पहचान की जांच की गई। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त गश्त बढ़ाई गई है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। सीमा से जुड़े क्षेत्रों में भी सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक सतर्क रखी गई है।
प्रशासन ने बिना पूर्व अनुमति किसी भी प्रकार की रैली, धरना या सार्वजनिक प्रदर्शन पर अस्थायी रोक लगा दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आम नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
इसी बीच कुछ राजनीतिक दलों ने इस दिन को विरोध दिवस के रूप में मनाते हुए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए। उनका कहना है कि जम्मू-कश्मीर को पहले जैसा विशेष दर्जा और पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिया जाना चाहिए। दूसरी ओर प्रशासन का मुख्य फोकस पूरे क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और सामान्य जनजीवन को बनाए रखने पर है। किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
पुलिस ने आम नागरिकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी करते हुए सभी से शांति बनाए रखने की अपील की है। लोगों से कहा गया है कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि, संदिग्ध व्यक्ति या असामान्य परिस्थिति दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या संबंधित सुरक्षा एजेंसी को दें। अधिकारियों का मानना है कि नागरिकों का सहयोग सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
हाल के दिनों में सुरक्षा संबंधी घटनाओं को देखते हुए नियंत्रण रेखा और सीमावर्ती गांवों में भी सुरक्षा बलों की गतिविधियां बढ़ाई गई हैं। कई स्थानों पर फ्लैग मार्च आयोजित किए गए ताकि लोगों में सुरक्षा का भरोसा कायम रहे और किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके। सुरक्षा एजेंसियां आधुनिक निगरानी उपकरणों की सहायता से लगातार हालात पर नजर रख रही हैं।
एक विरोध प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय ध्वज के प्रदर्शन को लेकर भी विवाद सामने आया, जिसके बाद संबंधित मामले की कानूनी जांच पर विचार किया जा रहा है। भारतीय ध्वज के उपयोग और प्रदर्शन के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। ध्वज संहिता के अनुसार तिरंगे का सही स्वरूप, रंगों का क्रम और सम्मान बनाए रखना अनिवार्य है तथा किसी भी प्रकार का उल्लंघन कानून के दायरे में आता है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 के प्रावधानों को समाप्त करने का निर्णय लिया था और इसके साथ ही राज्य का पुनर्गठन भी किया गया। बाद में इस निर्णय को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने दिसंबर 2023 में अपने फैसले में राष्ट्रपति के आदेश को वैध माना और कहा कि आर्टिकल 370 एक अस्थायी प्रावधान था। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के सभी प्रावधान जम्मू-कश्मीर पर लागू हो सकते हैं तथा पुनर्गठन से जुड़े निर्णय को भी वैध माना गया।

