शिक्षक दिवस के अवसर पर देशभर के 48 स्कूल शिक्षकों को नेशनल टीचर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिक्षकों को यह सम्मान प्रदान किया। पुरस्कार पाने वालों में केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल, आदर्श जनजातीय स्कूल और पीएम श्री स्कूलों से जुड़े शिक्षक शामिल रहे।
सम्मानित शिक्षकों ने शिक्षा को बच्चों के लिए आसान, रोचक और व्यावहारिक बनाने के लिए अलग-अलग तरह की पहल की। किसी ने तकनीक का इस्तेमाल कर कठिन विषयों को सरल बनाया तो किसी ने पर्यावरण, अंतरिक्ष और प्रयोग आधारित शिक्षा को पढ़ाई का हिस्सा बनाया। इन प्रयासों ने छात्रों की सीखने में रुचि बढ़ाने में मदद की।
महाराष्ट्र के वैभव वसंतराव कुलकर्णी ने गणित जैसे कठिन विषय को आसान तरीके से समझाने के लिए कई नए प्रयोग किए। उन्होंने छात्रों की मदद के लिए 700 से ज्यादा शैक्षणिक वीडियो तैयार किए। इसके अलावा कम खर्च वाले मॉडल और नए शिक्षण तरीकों के जरिए गणित को बच्चों के लिए अधिक समझने योग्य बनाने का प्रयास किया।
राजस्थान के दिव्येंदु सेन ने पढ़ाई को प्रकृति और तकनीक से जोड़ने की पहल की। उन्होंने स्कूल परिसर में मौजूद करीब 500 पेड़ों पर QR कोड लगाए, जिनकी मदद से बच्चे पेड़ों से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकते हैं। उन्होंने छात्रों को अंतरिक्ष से जुड़ी गतिविधियों में भी शामिल किया और उनके साथ 12 नए क्षुद्र ग्रहों की खोज में योगदान दिया।
पंजाब के दिनेश कुमार ने फिजिक्स की पढ़ाई को सरल बनाने के लिए वर्चुअल फिजिक्स लैब तैयार की। उन्होंने 100 से ज्यादा कम खर्च वाले मॉडल भी बनाए, ताकि छात्र केवल किताबों तक सीमित न रहें और प्रयोगों के माध्यम से विषय को बेहतर तरीके से समझ सकें। उनके प्रयासों से बच्चों में फिजिक्स को लेकर समझ और रुचि बढ़ाने पर जोर दिया गया।
हिमाचल प्रदेश की मंजरी महाजन ने शिक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी स्कूल गतिविधियों का हिस्सा बनाया। उन्होंने बच्चों को कचरा अलग करने, प्लास्टिक जमा करने और स्कूल परिसर को प्लास्टिक मुक्त रखने के लिए प्रेरित किया। इससे छात्रों में पढ़ाई के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया।
राजस्थान की डॉ. वर्तिका गुलाटी ने ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल कर छात्रों की पढ़ाई जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने ऑनलाइन कक्षाओं के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन फॉर्म जैसे साधनों का इस्तेमाल किया। कोविड के दौरान भी उन्होंने तकनीक के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई को जारी रखने का प्रयास किया।
चंडीगढ़ के रवि जयसवाल ने छात्रों को अंतरिक्ष और मौसम जैसे विषयों को व्यावहारिक तरीके से समझाने के लिए स्कूल में 3D गुंबद थिएटर और मौसम केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित कीं। इन माध्यमों से बच्चों को केवल किताबों में पढ़ने के बजाय प्रयोग और प्रत्यक्ष अनुभव के जरिए सीखने का अवसर मिला।
उत्तर प्रदेश की शालिनी कुशवाहा ने बच्चों को पढ़ाने के लिए खेल, गतिविधियों और अन्य रचनात्मक तरीकों का इस्तेमाल किया। उनकी पहल का उद्देश्य पढ़ाई को बच्चों के लिए अधिक रोचक बनाना रहा। इन प्रयासों के साथ स्कूल में विद्यार्थियों के दाखिले में भी बढ़ोतरी देखने को मिली।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस वर्ष 27 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों से 48 शिक्षकों का चयन किया गया। चयन प्रक्रिया जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तीन चरणों में पूरी हुई। नेशनल टीचर अवॉर्ड का उद्देश्य ऐसे शिक्षकों को सम्मानित करना है, जिन्होंने नए शिक्षण तरीकों और रचनात्मक पहलों के जरिए छात्रों की शिक्षा और विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

