जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में भोपाल के लंबे समय से लंबित मास्टर प्लान को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। बैठक के दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और आतिफ अकील ने मास्टर प्लान लागू नहीं होने का मुद्दा प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि जब तक शहर का मास्टर प्लान लागू नहीं किया जाता, तब तक विकास संबंधी बैठकों का उद्देश्य अधूरा रहेगा। उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्ट जवाब और शीघ्र निर्णय की मांग की।
चर्चा के दौरान फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत के हस्तक्षेप के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई और कुछ समय तक बैठक का वातावरण गर्म बना रहा। कांग्रेस विधायकों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि यदि उनकी बात को गंभीरता से नहीं सुना जाएगा तो ऐसी बैठकों में शामिल होने का कोई औचित्य नहीं है। इसके बाद दोनों विधायक नाराज होकर बैठक से बाहर चले गए।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे सांसद आलोक शर्मा ने स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया और दोनों विधायकों से बैठक में बने रहने का आग्रह भी किया, लेकिन वे वापस नहीं लौटे। बैठक के बाद सांसद ने कहा कि भोपाल के सुनियोजित और संतुलित विकास के लिए मास्टर प्लान का जल्द लागू होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इस विषय पर मुख्यमंत्री से जल्द मुलाकात कर मास्टर प्लान को शीघ्र लागू कराने का आग्रह किया जाएगा।
बैठक में भोपाल के विकास से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई। जनप्रतिनिधियों ने स्मार्ट सिटी परियोजना के कार्यों और शहर में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। सुझाव दिया गया कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर विकास कार्यों में तेजी लाई जाए ताकि नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
इसके अलावा बैठक में भोजपाल वेटलैंड प्राधिकरण के गठन का प्रस्ताव भी पारित किया गया। प्रस्ताव के अनुसार भोपाल और आसपास के वेटलैंड क्षेत्रों के संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और योजनाबद्ध विकास के लिए एक समर्पित प्राधिकरण गठित करने की अनुशंसा की जाएगी। इस प्रस्ताव को राज्य सरकार के समक्ष भेजने पर सहमति बनी। जनप्रतिनिधियों ने यह भी सुझाव दिया कि भोपाल को वेटलैंड सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं ताकि प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण के साथ शहर का सतत विकास सुनिश्चित हो सके।

