जबलपुर के बरगी बांध में 30 अप्रैल को हुए दर्दनाक क्रूज हादसे को लेकर अब एक नया और गंभीर दावा सामने आया है। हादसे के दौरान क्रूज चला रहे पायलट महेश पटेल ने कहा है कि क्रूज के एक इंजन में लंबे समय से तकनीकी खराबी थी और इसकी जानकारी अक्टूबर में ही प्रबंधन को दे दी गई थी। उनके अनुसार, इस संबंध में मुख्यालय तक लिखित सूचना भी भेजी गई थी, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई।
शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में पीड़ितों, मृतकों के परिजनों और संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जा रहे थे। इसी दौरान महेश पटेल ने मीडिया और अधिकारियों के सामने यह जानकारी साझा की। उन्होंने यह भी कहा कि हादसे के बाद उनके बारे में जो बातें कही गईं कि वे क्रूज से कूदकर भाग गए थे, वे पूरी तरह गलत हैं।
“मैंने यात्रियों को बचाने की कोशिश की”
महेश पटेल ने बताया कि हादसे के समय उन्होंने कई लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया। उनके मुताबिक, अचानक पानी की तेज लहर क्रूज के भीतर घुस गई, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई और वे खुद भी बह गए।
उन्होंने कहा कि यात्रियों को पहले से लाइफ जैकेट पहनने के लिए कहा गया था, लेकिन किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया। पटेल ने यह भी स्पष्ट किया कि बरगी बांध में केवल वही क्रूज नहीं चलाते, बल्कि वहां कई अन्य चालक भी संचालन करते हैं।
अक्टूबर में भेजा गया था तकनीकी खामी का पत्र
महेश पटेल के अनुसार, अक्टूबर 2026 में बरगी स्थित मैकल रिसॉर्ट के मैनेजर द्वारा लिखित रूप से क्रूज की तकनीकी समस्याओं की जानकारी दी गई थी। इस पत्र में उल्लेख किया गया था कि क्रूज के दो इंजनों में से एक इंजन धीमी गति से काम कर रहा है और उसकी क्षमता लगातार कम हो रही है।
पत्र में यह भी बताया गया था कि दूसरा इंजन स्टार्ट होने के बाद कभी भी बंद हो जाता था। यह सूचना पर्यटन विभाग के माध्यम से भोपाल स्थित जल क्रीड़ा विभाग के महाप्रबंधक तक पहुंचाई गई थी।
पटेल का आरोप है कि इतनी गंभीर चेतावनी मिलने के बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया और फाइल दबा दी गई।
“शिकायत करने वाले मैनेजर को ही सस्पेंड कर दिया”
महेश पटेल ने दावा किया कि तकनीकी खामियों की जानकारी देने वाले मैनेजर सुनील मरावी को बाद में सस्पेंड कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्र की जानकारी सार्वजनिक न हो, इसके लिए दबाव भी बनाया गया।
हालांकि, जब इस मामले में सुनील मरावी से संपर्क किया गया तो उन्होंने पहले बातचीत से इनकार किया और बाद में कहा कि उन्होंने ऐसा कोई पत्र नहीं लिखा था।
एक इंजन के भरोसे चल रहा था संचालन
पटेल ने बताया कि खराब इंजन स्टार्ट तो हो जाता था और गियर भी लग जाते थे, लेकिन उसका पिकअप बेहद कमजोर था। स्पीड 12 से ऊपर नहीं जा रही थी, इसलिए उस इंजन का उपयोग लगभग बंद कर दिया गया था और ज्यादातर संचालन एक ही इंजन के सहारे किया जा रहा था।
उन्होंने यह भी कहा कि बरगी बांध में संचालित दो क्रूज में से एक काफी समय से बंद पड़ा है और उसके दोनों इंजन भी खराब बताए जा रहे हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों ने भी किया था सफर
जानकारी के मुताबिक, जिला कलेक्टर समेत कई प्रशासनिक अधिकारी पहले इस क्रूज में सफर कर चुके हैं। इसके बावजूद तकनीकी खामियों को लेकर किसी बड़े स्तर पर सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए।
अब हादसे के बाद यह सवाल लगातार उठ रहा है कि यदि खराबी की जानकारी पहले से थी, तो संचालन जारी रखने की अनुमति कैसे दी गई।
हादसे में 13 लोगों की गई जान
बरगी बांध में हुए इस हादसे में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में 4 बच्चे और 8 महिलाएं शामिल हैं। घटना के बाद से ही सुरक्षा मानकों, तकनीकी जांच और प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला, FIR दर्ज करने के निर्देश
मामले ने अब कानूनी रूप भी ले लिया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में शुक्रवार को एक और याचिका दायर की गई। जबलपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता पुष्पा तिवारी ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और पर्यटन विभाग को पक्षकार बनाते हुए एसआईटी जांच की मांग की है।
याचिका में कहा गया है कि आईजी रैंक के आईपीएस अधिकारियों की टीम गठित कर 60 दिनों के भीतर जांच पूरी की जाए और रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की जाए। इस मामले में जल्द सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
इधर, न्यायालय ने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश भी दिए हैं। बरगी थाना पुलिस को दो दिनों के भीतर कार्रवाई कर न्यायालय को अवगत कराने के लिए कहा गया है। संभावना है कि क्रूज के कैप्टन पर एफआईआर दर्ज की जा सकती है।
“जांच से पहले क्रूज तोड़ना भी सवालों के घेरे में”
बरगी से भाजपा विधायक और प्रदेश प्रवक्ता नीरज सिंह ने भी मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह जानकारी सामने आ रही है कि जांच पूरी होने से पहले ही क्रूज को तोड़ दिया गया। इसकी भी जांच कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर किन अधिकारियों के निर्देश पर और किस कारण इतनी जल्दी क्रूज को तोड़ा गया। उनके मुताबिक, यदि इंजन में तकनीकी खराबी थी तो जांच के दौरान इसका खुलासा हो जाएगा।
अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि हादसे की वास्तविक जिम्मेदारी किसकी तय होगी और दोषियों पर कार्रवाई कब तक की जाएगी।