बुरहानपुर दौरे पर CM मोहन यादव: ऑडिटोरियम में उद्योगपतियों से किया संवाद, कहा – निमाड़ में होगी इन्वेस्टर्स समिट; मंच पर कार्यकर्ताओं को खिलाई झालमुड़ी

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बुधवार का बुरहानपुर दौरा विकास, निवेश और राजनीतिक संदेश—तीनों ही स्तरों पर खासा महत्वपूर्ण रहा। सुबह करीब 10:30 बजे वे रेणुका माता हेलीपैड पर पहुंचे और वहां से सीधे परमानंद गोविंदजीवाला ऑडिटोरियम पहुंचे, जहां उन्होंने स्थानीय उद्योगपतियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत संवाद किया। इस दौरान निमाड़ क्षेत्र को लेकर एक अहम घोषणा करते हुए उन्होंने यहां इन्वेस्टर्स समिट आयोजित करने की बात दोहराई।

उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत में मुख्यमंत्री ने साफ किया कि निमाड़ को औद्योगिक दृष्टि से मजबूत बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए समिट का आयोजन किया जाएगा, ताकि उद्योगों को नई दिशा मिल सके। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि राज्य स्तर पर प्रस्तावित ‘व्यापारी कल्याण बोर्ड’ को लेकर कैबिनेट में चर्चा हो चुकी है और आगे इसे जिला स्तर तक प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।

इस संवाद के दौरान कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने इस वर्ष को किसान कल्याण वर्ष के रूप में समर्पित किया है और बुरहानपुर के केला उत्पादकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि क्षेत्र का व्यापारिक आकार पहले की तुलना में बढ़कर 400 करोड़ से 800 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसके अलावा निंबोला औद्योगिक क्लस्टर के विकास के लिए 350 करोड़ रुपये की पहली किश्त जारी किए जाने की जानकारी भी उन्होंने दी। उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं, जो सरकार की नीतियों का परिणाम है।

औद्योगिक संवाद के बाद मुख्यमंत्री उसी परिसर में आयोजित भाजपा के ‘विजय उत्सव’ और ‘जन विश्वास उत्सव’ कार्यक्रम में शामिल हुए। यह आयोजन बुरहानपुर विधायक अर्चना चिटनिस द्वारा पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में पार्टी की जीत की खुशी में किया गया था। कार्यक्रम के दौरान एक अलग ही दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री ने मंच पर बैठकर झालमुड़ी का स्वाद लिया और अपने हाथों से उपस्थित नेताओं व कार्यकर्ताओं को भी परोसी। जिन लोगों को उन्होंने झालमुड़ी दी, उनमें जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, नेपानगर विधायक मंजू दादू, पूर्व विधायक सुमित्रा देवी कास्डेकर और भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने समेत अन्य कार्यकर्ता शामिल थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पर तीखे शब्दों में हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश के बंटवारे और समाज में विभाजन की राजनीति के लिए कांग्रेस जिम्मेदार रही है। उनके अनुसार, वंदे मातरम को लेकर विवाद खड़ा करना और भगवान राम के मंदिर पर ताला लगाना भी कांग्रेस के निर्णयों का हिस्सा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद राम मंदिर को सभी समुदायों ने स्वीकार किया, लेकिन कांग्रेस के नेता अब तक वहां दर्शन के लिए नहीं पहुंचे।

अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने अन्य विपक्षी नेताओं पर भी टिप्पणी की। उन्होंने अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीतिक जवाबदेही के मामले में विपक्ष गंभीर नहीं दिखता। उन्होंने आरोप लगाया कि हार के बावजूद पद पर बने रहने की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है।

पश्चिम बंगाल के संदर्भ में उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद वहां वास्तविक बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, हालिया चुनावों में सभी वर्गों, जिसमें मुस्लिम समुदाय भी शामिल है, ने बड़ी संख्या में भाजपा का समर्थन किया है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्य के 17वें मुख्यमंत्री गुरु रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर शपथ लेने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस घटनाक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि करीब 75 वर्षों बाद बंगाल सही मायनों में नई दिशा की ओर बढ़ता नजर आ रहा है।

कुल मिलाकर, बुरहानपुर में मुख्यमंत्री का यह दौरा एक तरफ जहां निवेश और विकास की योजनाओं पर केंद्रित रहा, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक माहौल में भी स्पष्ट संदेश देने वाला साबित हुआ।