इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई मौतों का मामला अब प्रदेश की सीमाओं से बाहर निकलकर संसद के ऊपरी सदन तक पहुंच गया है। 29 से अधिक लोगों की जान जाने के बाद यह मुद्दा सोमवार को राज्यसभा में उठा, जहां कांग्रेस सांसदों ने केंद्र सरकार से सीधे जवाब मांगे और जल आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए।
राज्यसभा में इस मुद्दे को सबसे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद प्रमोद तिवारी ने उठाया। उन्होंने कहा कि पानी केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि जीवन से जुड़ा सबसे बुनियादी विषय है और जब सरकार द्वारा दिया गया पानी ही जहरीला हो जाए, तो यह बेहद गंभीर स्थिति बन जाती है।
“जहरीला पानी पिलाया जा रहा है, इसमें कोई दो राय नहीं”
प्रमोद तिवारी ने सदन में कहा कि जल आपूर्ति से जुड़ा यह मामला सीधे मानवता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस विभाग से पानी की सप्लाई जुड़ी है, उसमें भ्रष्टाचार की जड़ें बेहद गहरी हैं।
उन्होंने कहा कि इस विभाग में जितना करप्शन है, शायद किसी और विभाग में उतना नहीं है। ऐसे में इस पूरे सिस्टम पर गंभीरता से विचार किए जाने की जरूरत है। तिवारी ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि सरकार इस समस्या से निपटने के लिए अपनी कार्ययोजना सदन के सामने रखे।
सभापति की मौजूदगी में उठाया गया मामला
राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन की अध्यक्षता में हुई कार्यवाही के दौरान प्रमोद तिवारी ने कहा कि यह विषय किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है। उन्होंने गुजरात के गांधीनगर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी प्रदूषित जल पीने से लोग बीमार हुए थे।
उन्होंने कहा कि इंदौर में अब तक 29 लोगों की मौत हो चुकी है और यह हालिया स्थिति है। उन्होंने राज्य मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जब हालात इतने गंभीर हों, तो कैबिनेट मंत्री को खुद खड़े होकर मोर्चा संभालना चाहिए।
तिवारी ने सवाल किया कि ग्राउंड वाटर की गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकार के पास क्या ठोस योजना है और क्या सदन को इस पर कोई भरोसा दिलाया जा सकता है।
इमरान प्रतापगढ़ी ने तय की जिम्मेदारी की मांग
महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी इस मुद्दे पर सरकार से सीधे सवाल किए। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है।
उन्होंने पूछा कि क्या यह केवल राज्य सरकार की जिम्मेदारी है या फिर केंद्र सरकार और जल शक्ति मंत्रालय की भी भूमिका बनती है। इमरान प्रतापगढ़ी ने यह भी जानना चाहा कि क्या जल शक्ति मंत्रालय ने इस मामले में राज्य सरकार से कोई रिपोर्ट मांगी है और क्या राज्य सरकार ने कोई रिपोर्ट केंद्र को सौंपी है।
पहले भी उठ चुका है मुद्दा
यह पहली बार नहीं है जब इंदौर की जल आपूर्ति व्यवस्था पर संसद में सवाल उठे हों। इससे पहले कर्नाटक से राज्यसभा सांसद और कांग्रेस नेता डॉ. सैयद नासिर हुसैन ने भी इंदौर के स्वच्छता और जल आपूर्ति सिस्टम को लेकर सरकार से सीधे सवाल किए थे।
मौतों का आंकड़ा बढ़कर 32 पहुंचा
इधर, भागीरथपुरा में हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। दूषित पानी पीने से मौतों का सिलसिला जारी है। सोमवार को भी एक व्यक्ति की मौत इलाज के दौरान हो गई। इसके साथ ही इंदौर में दूषित पानी से मरने वालों की संख्या बढ़कर 32 हो चुकी है।
यह मामला अब केवल स्थानीय प्रशासन या राज्य सरकार तक सीमित नहीं रह गया है। संसद में उठे सवालों के बाद केंद्र सरकार पर भी जवाब देने का दबाव बढ़ता जा रहा है।