प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को केंद्रीय सचिवों के साथ अहम बैठक की। बैठक में देश के विकास और भविष्य की जरूरतों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे विश्वविद्यालयों और युवाओं के साथ ज्यादा संवाद करें। इससे नीतियां बनाने में युवाओं के नए और अलग विचारों को शामिल किया जा सकेगा।
बैठक में शिक्षा और युवाओं से जुड़े विषयों के साथ-साथ देश में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाने पर जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री ने सचिवों से कहा कि वे वर्तमान समस्याओं और उपलब्ध आंकड़ों पर ध्यान देने के साथ-साथ देश के भविष्य के बारे में भी सोचें। उन्होंने अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियां बेहतर तरीके से निभाने की बात कही।
सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े मंत्रालयों के कामकाज पर भी बैठक में चर्चा हुई। इन क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति तैयार करने पर जोर दिया गया।
डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बेहतर इस्तेमाल को लेकर भी प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने AI के इस्तेमाल में मानवीय निगरानी और उचित निर्णय को जरूरी बताया।
रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने पर भी खास जोर दिया गया। खासकर रक्षा क्षेत्र में शोध और नई तकनीक को बढ़ाकर भारत को वैश्विक स्तर पर ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाने की बात कही गई।
बैठक में समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने और शिपबिल्डिंग से जुड़े लक्ष्यों की समीक्षा करने पर भी चर्चा हुई। शिपबिल्डिंग को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा मिलने के बाद इसके प्रभावों पर नजर रखने की बात कही गई।
पोर्ट्स को केवल बनाने के बजाय उनके आसपास आर्थिक गतिविधियों और विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। इसके लिए पोर्ट-लेड डेवलपमेंट की दिशा में व्यापक योजना बनाने की जरूरत बताई गई।
मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट सेक्टर को बेहतर कनेक्टिविटी देने पर भी चर्चा हुई। बैठक में अलग-अलग मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल के साथ देश की अर्थव्यवस्था और विकास को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

