संसद के मानसून सत्र के नौवें दिन गुरुवार को राजनीतिक माहौल काफी गरमाया रहा। कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्षी दलों के सांसद संसद परिसर के मकर द्वार पर एकत्र हुए और केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई रहा। विपक्ष ने इन दोनों मामलों को जनता की भावनाओं और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा बताते हुए सरकार से जवाब मांगा।
प्रदर्शन में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल हुईं। उन्होंने विपक्षी सांसदों के साथ नारेबाजी करते हुए कहा कि सरकार को संसद के भीतर इन मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि छात्र प्रदर्शनकारियों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। साथ ही राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की गई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की बात उठाई गई।
सुबह 11 बजे लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई, लेकिन लोकसभा में शुरुआत से ही हंगामे की स्थिति बन गई। विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए सरकार से जवाब मांगते रहे, जिसके कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। शोर-शराबे और लगातार विरोध के बीच लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई। यह मानसून सत्र के दौरान लगातार बढ़ते टकराव का एक और उदाहरण माना जा रहा है।
कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को गंभीर मुद्दा बताते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में छात्रों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश किस स्तर पर दिया गया, यह देश को बताया जाना चाहिए। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से सीधे जवाब देने की मांग की और आरोप लगाया कि सरकार इस मामले पर संसद में चर्चा से बच रही है। विपक्ष का कहना है कि छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।
प्रियंका गांधी ने भी प्रदर्शन के दौरान कहा कि गृह मंत्री को सदन में उपस्थित होकर पूरे घटनाक्रम पर जवाब देना चाहिए। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार संवेदनशील मुद्दों पर जवाबदेही से बच रही है। राम मंदिर से जुड़े आरोपों को लेकर भी विपक्ष ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े किसी भी मामले में पूरी पारदर्शिता जरूरी है। प्रदर्शन के दौरान कई विपक्षी सांसदों ने संयुक्त रूप से सरकार के खिलाफ नारे लगाए और संसद परिसर में विरोध दर्ज कराया।
इसी बीच राज्यसभा में दोपहर 2 बजे से पेपर लीक से जुड़े पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश किए जाने की तैयारी की गई। सरकार इस विधेयक को परीक्षा प्रणाली में धोखाधड़ी रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है। जानकारी के अनुसार इस पर करीब सात घंटे चर्चा होने की संभावना है और विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेता इसमें हिस्सा लेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी इस बहस में शामिल हो सकते हैं।
यह विधेयक एक दिन पहले लोकसभा में लंबी चर्चा के बाद पारित किया जा चुका है। सरकार का कहना है कि पेपर लीक के मामलों में कड़ी सजा और सख्त कानूनी प्रावधान युवाओं के भविष्य की रक्षा करेंगे। दूसरी ओर विपक्ष ने कहा कि केवल दंड बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका तर्क है कि परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार, संस्थागत जवाबदेही, भर्ती प्रक्रियाओं की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने जैसे कदम भी उतने ही आवश्यक हैं।
लोकसभा में आज सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने से जुड़े संशोधन विधेयक पर भी चर्चा प्रस्तावित है। हालांकि विपक्ष के हंगामे के कारण यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि निर्धारित कार्यसूची के अनुसार चर्चा आगे बढ़ पाएगी या नहीं। संसद के दोनों सदनों में सरकार और विपक्ष के बीच लगातार बढ़ते टकराव ने विधायी कामकाज की रफ्तार पर असर डाला है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह टकराव और तेज हो सकता है।
सत्र के दौरान विपक्ष लगातार छात्र आंदोलनों, पुलिस कार्रवाई, परीक्षा घोटालों और जवाबदेही जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहा है। वहीं सरकार का कहना है कि वह युवाओं के हितों की रक्षा और परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है, जिससे संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह माहौल संवेदनशील बना हुआ है।
कुल मिलाकर गुरुवार का दिन संसद में तीखे राजनीतिक संघर्ष, विपक्ष के आक्रामक रुख और महत्वपूर्ण विधेयकों पर संभावित बहस के नाम रहा। एक ओर विपक्ष सरकार को जवाबदेही के मुद्दे पर घेरने में जुटा है, तो दूसरी ओर सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। अब निगाहें दोपहर बाद की कार्यवाही पर हैं, जहां यह तय होगा कि सदन में संवाद और बहस का रास्ता खुलता है या फिर टकराव और हंगामे का दौर जारी रहता है।

