राहुल गांधी का केंद्र पर हमला: “सख्ती छात्रों पर, लेकिन पेपर लीक पर सरकार पूरी तरह नाकाम”

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राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर पेपर लीक के मुद्दे को लेकर तीखा हमला बोला है। शनिवार सुबह उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए कई सख्त कदम उठाए, लेकिन इसके बावजूद देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों पर रोक लगाने में पूरी तरह असफल रही। राहुल गांधी ने अपने संदेश में कहा कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने में तो पूरी ताकत लगा रही है, लेकिन युवाओं के भविष्य से जुड़े सबसे गंभीर मुद्दे का समाधान करने में नाकाम साबित हुई है। इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि वह सुबह 11:30 बजे अपने आवास 10 जनपथ के बाहर मीडिया से बातचीत कर इस पूरे मुद्दे पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे।

अपने बयान में राहुल गांधी ने कहा कि विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ प्रशासन ने कई तरह की पाबंदियां लगाईं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान मेट्रो सेवाओं को प्रभावित किया गया, कई रास्तों को बंद किया गया, दुकानों को बंद कराने की कोशिश की गई, इंटरनेट सेवाएं बाधित की गईं और प्रदर्शनकारियों तक जरूरी सुविधाएं पहुंचने में भी दिक्कतें पैदा की गईं। राहुल का कहना था कि सरकार ने हर स्तर पर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाल सकी। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार की प्राथमिकता गलत दिशा में दिखाई देती है।

राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था लगातार विवादों और अव्यवस्थाओं का सामना कर रही है तथा इसके लिए शिक्षा मंत्रालय की जवाबदेही तय होनी चाहिए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने लाखों छात्रों का भरोसा कमजोर किया है और इस स्थिति में शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है।

शुक्रवार को राहुल गांधी ने अपने आवास 10 जनपथ पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी, जिसमें प्रदर्शन के दौरान घायल हुए एक छात्र को भी साथ लाया गया। इस दौरान उन्होंने मीडिया के सामने छात्र की चोटों का जिक्र करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने वाले छात्रों के साथ कठोर व्यवहार नहीं होना चाहिए। राहुल ने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों को अपनी बात रखने का अधिकार है और उनकी आवाज को बल प्रयोग से दबाने के बजाय उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को आंदोलन के कारणों पर ध्यान देना चाहिए, न कि केवल उसे रोकने पर।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने घायल छात्र के हाथ, पीठ और सीने पर लगी चोटों का उल्लेख करते हुए कहा कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल था। राहुल के अनुसार छात्र तिरंगा लेकर प्रदर्शन कर रहा था, लेकिन इसी दौरान वह घायल हो गया। उन्होंने इस घटना को लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान किसी भी छात्र को ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना चाहिए। राहुल ने कहा कि युवाओं की मांगों को समझने और उनका समाधान निकालने की दिशा में सरकार को संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए।

यह पूरा विवाद 20 जुलाई को आयोजित उस प्रदर्शन के बाद और अधिक चर्चा में आया, जिसमें नीट पेपर लीक के विरोध में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की घटनाएं सामने आईं, जिनमें कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए। इसी दौरान घायल हुए छात्रों में साहिल लोचाब भी शामिल थे। घटना के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया और विपक्ष ने सरकार से इस पूरे मामले पर जवाब मांगा।

साहिल लोचाब दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के नजफगढ़ के रहने वाले 19 वर्षीय छात्र हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) में पढ़ाई कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी आंख में गंभीर चोट लगने के कारण डॉक्टरों को सर्जरी करनी पड़ी। यह मामला सामने आने के बाद राहुल गांधी ने घायल छात्र से मुलाकात की और उसकी स्थिति को सार्वजनिक रूप से उठाते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।

परिवार के अनुसार डॉक्टरों ने बताया कि साहिल की दाहिनी आंख को गंभीर नुकसान पहुंचा है और उसकी रोशनी वापस आने की संभावना बेहद कम है। इलाज के बाद भी डॉक्टर लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। साहिल के परिवार का कहना है कि वह हमेशा पढ़ाई के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता रहा है और भविष्य में पुलिस अधिकारी बनने का सपना देखता था। परिवार ने उम्मीद जताई है कि उसे बेहतर इलाज मिले और उसकी पढ़ाई प्रभावित न हो। इस घटना ने छात्रों की सुरक्षा और विरोध प्रदर्शनों के दौरान अपनाए जाने वाले तरीकों पर भी कई सवाल खड़े किए हैं।

राहुल गांधी ने कहा कि देश के लाखों छात्र लंबे समय से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बार-बार पेपर लीक की घटनाओं के कारण मेहनत करने वाले विद्यार्थियों का मनोबल टूट रहा है और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने, पेपर लीक रोकने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं ताकि छात्रों का भरोसा दोबारा कायम हो सके।

अपने ताजा बयान और मीडिया से बातचीत के जरिए राहुल गांधी ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि वह पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के अधिकारों के मुद्दे को लगातार उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में केवल प्रशासनिक सख्ती पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी नीतियां बननी चाहिए जो परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करें और छात्रों को न्याय दिला सकें। राहुल गांधी ने सरकार से आग्रह किया कि वह विरोध प्रदर्शनों को रोकने के बजाय शिक्षा व्यवस्था की कमियों को दूर करने पर ध्यान दे, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और विद्यार्थियों का विश्वास शिक्षा प्रणाली में बना रहे।