देशभर में NEET पेपर लीक मामले को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद अब उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ता आमने-सामने दिखाई दिए। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने प्रदर्शन तेज कर दिया है, जबकि भाजपा ने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन का जवाब अपने स्तर पर देने की रणनीति अपनाई। कई स्थानों पर पुलिस को हालात संभालने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने पड़े और बैरिकेडिंग, वाटर कैनन तथा अन्य इंतजाम किए गए।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कांग्रेस कार्यालय के बाहर माहौल सबसे अधिक चर्चा में रहा। भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस कार्यालय की ओर मार्च करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और तीखी नारेबाजी देखने को मिली। इसी दौरान कांग्रेस कार्यालय परिसर में महिला कार्यकर्ताओं को लाठियां लेकर सुरक्षा के लिए तैनात देखा गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रही है, लेकिन यदि किसी प्रकार का हमला किया गया तो कार्यकर्ता उसका जवाब देने के लिए तैयार रहेंगे। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कांग्रेस कार्यालय के आसपास भारी पुलिस बल मौजूद रहा।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में भी प्रदर्शन का दौर लगातार जारी रहा। कांग्रेस ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर भाजपा प्रदेश कार्यालय की ओर कूच किया, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। पुलिस ने पहले से बैरिकेडिंग कर रखी थी और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। वहीं दूसरी ओर भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस कार्यालय का घेराव करने की कोशिश की, जिसके दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी धक्का-मुक्की हुई। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।


बिहार की राजधानी पटना में स्थिति सबसे ज्यादा तनावपूर्ण रही। NEET पेपर लीक के विरोध में मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे छात्रों को पुलिस ने पहले बैरिकेडिंग लगाकर रोकने का प्रयास किया। जब छात्र पीछे नहीं हटे तो पुलिस ने लाठीचार्ज किया और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इसके बाद हालात और बिगड़ गए तथा डाकबंगला चौराहे के आसपास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर पत्थरबाजी हुई, पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचा और कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए। प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर पूरे इलाके की निगरानी बढ़ा दी।
पटना में ही कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच अलग से राजनीतिक टकराव देखने को मिला। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया, जिसके दौरान दोनों पक्षों के समर्थक आमने-सामने आ गए। विवाद बढ़ने पर दोनों ओर से पत्थर और डंडे चलने की घटनाएं सामने आईं। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकर्ता पहले से तैयारी के साथ मौजूद थे, जबकि कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया। प्रारंभिक चरण में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे, हालांकि बाद में पुलिस ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को अलग किया और स्थिति पर नियंत्रण पाने का प्रयास किया।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में विपक्षी नेताओं के साथ हुई कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस और धक्का-मुक्की हुई। कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लेकर वाहनों में बैठाया। इसी दौरान बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। वहीं बहराइच में समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं को एहतियातन नजरबंद किया गया ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।
मध्य प्रदेश में भी विधानसभा से लेकर सड़कों तक इस मुद्दे की गूंज सुनाई दी। कांग्रेस विधायक काली पट्टी बांधकर विधानसभा पहुंचे और NEET पेपर लीक, छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई तथा विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी के मुद्दे पर चर्चा की मांग की। जब सदन में इस विषय पर चर्चा की अनुमति नहीं मिली तो विपक्ष ने जोरदार विरोध दर्ज कराया और सदन के भीतर हंगामा हुआ। दूसरी ओर भोपाल में भाजपा ने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के जवाब में अपना कार्यक्रम आयोजित किया। प्रदर्शन के दौरान कुछ विवादित पोस्टर सामने आने के बाद पार्टी नेताओं ने उन्हें तुरंत हटवा दिया, ताकि किसी नए विवाद को जन्म न मिले।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भाजपा और कांग्रेस दोनों के प्रदर्शन एक ही दिन होने से माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस कार्यालय की ओर मार्च किया, जबकि कांग्रेस समर्थक भी बड़ी संख्या में वहां पहुंच गए। दोनों पक्षों के आमने-सामने आने के बाद पुलिस ने सुरक्षा घेरा मजबूत किया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया और हालात नियंत्रण में रखने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अलग से लोकभवन का घेराव किया, जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। कुछ स्थानों पर कांग्रेस समर्थकों ने भजन-कीर्तन के माध्यम से भी अपना विरोध दर्ज कराया।
हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र में भी इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। हरियाणा के कई जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किए और कुछ स्थानों पर प्रधानमंत्री का प्रतीकात्मक पुतला जलाकर विरोध जताया। गुजरात के अहमदाबाद में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रैली निकाली, जिसे पुलिस ने बीच रास्ते में रोक दिया। कई नेताओं को हिरासत में लिया गया और कुछ कार्यकर्ता पुलिस वाहनों पर चढ़ गए, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। वहीं मुंबई में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन और नारेबाजी की, जिसके बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर स्थिति सामान्य करने का प्रयास किया।
पूरे घटनाक्रम के केंद्र में NEET पेपर लीक विवाद और शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल हैं। विपक्ष लगातार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है। दूसरी ओर भाजपा कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए आंदोलन करने का आरोप लगा रही है। दोनों दलों के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव के कारण कई राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। फिलहाल देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं और प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी कर रहा है।

