जगन्नाथ रथ यात्रा का शुभारंभ आज, भगवान जगन्नाथ भाई-बहनों संग निकलेंगे भक्तों के बीच

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पुरी में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की विश्वप्रसिद्ध वार्षिक रथ यात्रा का शुभारंभ श्रद्धा और परंपराओं के बीच हो गया है। सुबह मंगला आरती के बाद पारंपरिक पाहंडी अनुष्ठान शुरू हुआ, जिसके अंतर्गत सबसे पहले भगवान सुदर्शन, फिर भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और अंत में भगवान जगन्नाथ को गर्भगृह से बाहर लाकर उनके भव्य रथों तक ले जाया गया। तीनों देवताओं को क्रमशः तालध्वज, दर्पदलन और नंदीघोष रथ पर विराजमान करने की प्रक्रिया धार्मिक विधि-विधान के अनुसार संपन्न की जा रही है। रथों पर स्थापित होने से पहले देव विग्रहों की परिक्रमा, रथ बीजे और अन्य पारंपरिक अनुष्ठान भी आयोजित किए जा रहे हैं।

लगातार हो रही बारिश के बावजूद पुरी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। मौसम विभाग ने भारी वर्षा और गरज-चमक की चेतावनी जारी की है, फिर भी श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिख रही। प्रशासन ने ग्रैंड रोड पर जलभराव और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए हैं ताकि श्री जगन्नाथ मंदिर से श्री गुंडिचा मंदिर तक निकलने वाली रथ यात्रा सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।

धार्मिक परंपरा के अनुसार सभी आवश्यक अनुष्ठानों के पूरा होने के बाद रथों में लकड़ी के घोड़े जोड़े जाएंगे और फिर श्रद्धालु रस्सियों के सहारे रथों को खींचना शुरू करेंगे। सबसे पहले भगवान बलभद्र का तालध्वज रथ, उसके बाद देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ और अंत में भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करेगा। इस दौरान पुरी नगरी जय जगन्नाथ के जयघोष, भजन-कीर्तन और भक्तिमय वातावरण से गूंज उठेगी।

रथ यात्रा के अवसर पर पुरी समुद्र तट पर प्रसिद्ध रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने भगवान जगन्नाथ की विशाल रेत प्रतिमा और 100 लघु रेत रथ बनाकर श्रद्धांजलि अर्पित की, जिसने श्रद्धालुओं और पर्यटकों का विशेष आकर्षण हासिल किया। देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पर्व के साक्षी बन रहे हैं। रथ यात्रा से जुड़े प्रत्येक प्रमुख अनुष्ठान, मौसम की स्थिति, श्रद्धालुओं की भीड़ और यात्रा की हर महत्वपूर्ण गतिविधि से जुड़े ताजा अपडेट यहां पढ़ें।