परिसीमन विधेयक पर सुप्रिया सुले की दो टूक, बोलीं- पहले लागू हो 33% महिला आरक्षण, 50% को लेकर भी रखी मांग

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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को जल्द से जल्द लागू करने की मांग दोहराते हुए कहा कि इंडिया गठबंधन ने कभी भी महिला आरक्षण को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ने की बात नहीं की है। उनका कहना है कि सरकार को पहले महिलाओं को संवैधानिक रूप से मिले आरक्षण को लागू करना चाहिए, जबकि परिसीमन से जुड़े किसी भी प्रस्ताव पर विपक्षी दल विधेयक सामने आने के बाद सामूहिक रूप से अपना रुख तय करेंगे।

बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में सुप्रिया सुले ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी एनसीपी (एसपी) ने अभी तक परिसीमन को लेकर किसी भी स्तर पर सरकार के साथ कोई औपचारिक चर्चा नहीं की है। उन्होंने कहा कि न तो सरकार की ओर से इस विषय पर उनकी पार्टी से संपर्क किया गया है और न ही पार्टी ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बातचीत की है। उन्होंने कहा कि जब सरकार संसद में संबंधित विधेयक पेश करेगी, तभी उसकी सभी धाराओं का अध्ययन कर पार्टी अपना विस्तृत रुख सामने रखेगी।

सुले ने कहा कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर इंडिया गठबंधन के सभी दल आपसी चर्चा के बाद संयुक्त निर्णय लेंगे। उन्होंने बताया कि डीएमके, समाजवादी पार्टी और एनसीपी (एसपी) सहित कई सहयोगी दल पहले भी महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग उठाते रहे हैं। हालांकि उन्होंने दोहराया कि मौजूदा समय में विपक्ष की प्राथमिक मांग संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को बिना किसी देरी के लागू करना है।

उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे को परिसीमन से जोड़ना उचित नहीं है। उनके अनुसार, दोनों विषय अलग-अलग हैं और सरकार को महिलाओं को आरक्षण देने के अपने वादे को जल्द अमल में लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन की ओर से कभी भी यह शर्त नहीं रखी गई कि महिला आरक्षण केवल परिसीमन के बाद ही लागू किया जाए।

सुप्रिया सुले ने जानकारी दी कि इससे पहले विपक्षी दलों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के लिए इंडिया गठबंधन के सभी दलों को अलग-अलग बुलाने के बजाय एक साथ आमंत्रित किया जाए। उन्होंने बताया कि पिछले बजट सत्र के दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कुछ विपक्षी नेताओं को अलग-अलग बैठक के लिए बुलाया था, लेकिन विपक्ष ने सामूहिक चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया। इसी उद्देश्य से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में गृह मंत्री को पत्र भेजा गया था।

गौरतलब है कि संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 को संसद में पेश किया गया था, जिसका उद्देश्य संसदीय सीटों के पुनर्निर्धारण यानी परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना और महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का मार्ग प्रशस्त करना था। हालांकि यह विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। इसके पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े, जिसके कारण इसे पारित नहीं किया जा सका।

अब आगामी मानसून सत्र में यदि सरकार इस विषय पर नया विधेयक या संशोधित प्रस्ताव लेकर आती है, तो उस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच व्यापक चर्चा होने की संभावना है। सुप्रिया सुले ने संकेत दिया कि एनसीपी (एसपी) और इंडिया गठबंधन सरकार के प्रस्ताव का अध्ययन करने के बाद सामूहिक रूप से अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करेंगे, लेकिन महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को शीघ्र लागू करने की मांग पर उनका रुख पहले की तरह कायम रहेगा।