धार की ऐतिहासिक भोजशाला मंगलवार को विशेष धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र बनी रही। हाईकोर्ट और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से जुड़े फैसलों के बाद, हिंदू समाज को वर्षभर यानी 365 दिन पूजन का अधिकार मिलने के उपरांत भोजशाला परिसर में पहली बार मंगलवार को ‘महासत्याग्रह’ और ‘महाविजय महोत्सव’ का आयोजन किया गया। सुबह से ही परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ी रही और पूरे आयोजन में उत्साह का माहौल देखने को मिला।
आयोजन की शुरुआत मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना और अखंड ज्योति स्थापना के साथ हुई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने आतिशबाजी कर अपनी खुशी जाहिर की। भोजशाला परिसर में दिनभर धार्मिक अनुष्ठान, जयकारे और श्रद्धालुओं की उपस्थिति बनी रही।
पूजा-अर्चना से शुरू हुआ विशेष आयोजन
मंगलवार सुबह भोजशाला परिसर में धार्मिक गतिविधियां जल्दी शुरू हो गई थीं। श्रद्धालु बड़ी संख्या में मां वाग्देवी के दर्शन और पूजन के लिए पहुंचे। पूजा-अर्चना के साथ अखंड ज्योति की स्थापना की गई, जिसे आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया।
परिसर में श्रद्धालुओं के बीच विशेष उत्साह दिखाई दिया। बड़ी संख्या में लोग परिवार सहित पहुंचे और धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागी बने।
हवन, महाआरती और भजन संध्या में उमड़ी भीड़
दिनभर भोजशाला परिसर में धार्मिक माहौल बना रहा। यहां हवन-पूजन का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने भाग लिया। बाद में महाआरती भी संपन्न हुई।
आयोजन के दौरान भजन संध्या का भी आयोजन किया गया, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। परिसर में लगातार भक्ति गीत और धार्मिक जयकारे सुनाई देते रहे।
महाआरती के बाद श्रद्धालुओं ने आतिशबाजी कर अपनी खुशी व्यक्त की। पूरे माहौल को लेकर लोगों ने इसे बसंत पंचमी और दीपावली जैसे उत्सव की अनुभूति वाला दिन बताया।
‘महासत्याग्रह’ नाम देने के पीछे यह वजह
भोज उत्सव समिति से जुड़े गोपाल शर्मा ने बताया कि भोजशाला में प्रति मंगलवार सत्याग्रह का आयोजन पहले से होता रहा है। हालांकि, इस बार का मंगलवार अलग माना गया क्योंकि 365 दिन पूजन की अनुमति मिलने के बाद यह पहला मंगलवार था।
इसी कारण आयोजन को सामान्य सत्याग्रह के बजाय ‘महासत्याग्रह’ नाम दिया गया। उन्होंने बताया कि सत्याग्रह समाप्त होने के बाद अखंड ज्योति मंदिर परिसर में विजय महोत्सव भी मनाया गया।
घरों से पटाखे लेकर पहुंचे श्रद्धालु
महाविजय महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने अपने स्तर पर भी आयोजन में भागीदारी दिखाई। कई लोग अपने घरों से पटाखे लेकर भोजशाला पहुंचे और परिसर में आतिशबाजी कर खुशी व्यक्त की।
जयकारों और धार्मिक नारों के बीच श्रद्धालुओं ने इसे ऐतिहासिक अवसर बताया। पूरे आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और वातावरण उत्सवमय बना रहा।
मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को लंदन से वापस लाने की मांग तेज
भोजशाला पहुंच रहे श्रद्धालुओं के बीच एक और मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। कई श्रद्धालुओं ने मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को लंदन से वापस भारत लाने की मांग दोहराई।
श्रद्धालुओं का कहना है कि मां वाग्देवी का आध्यात्मिक स्वरूप अब भोजशाला में स्थापित हो चुका है और आगे मूल प्रतिमा को भी वापस लाकर यहां स्थापित किया जाना चाहिए।
रविवार को 24 घंटे तक विराजमान रहा था मां का स्वरूप
इससे पहले रविवार को हिंदू समाज द्वारा भोजशाला परिसर में मां वाग्देवी के प्रतिकृति स्वरूप की स्थापना की गई थी। उस दिन पूरे दिन धार्मिक अनुष्ठान आयोजित हुए थे।
बताया गया कि यह पहला अवसर था जब मां का स्वरूप लगातार 24 घंटे तक भोजशाला परिसर में विराजमान रहा और अखंड ज्योति भी निरंतर प्रज्वलित रही।
अब समाज की ओर से प्रतिदिन यहां नियमित पूजन किए जाने की बात कही जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था रही सख्त
मंगलवार को आयोजित कार्यक्रमों को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। भोजशाला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बल तैनात रहे।
आयोजन के दौरान प्रशासन की नजर पूरे घटनाक्रम पर बनी रही और व्यवस्था को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रबंध किए गए।
365 दिन पूजन के अधिकार के बाद भोजशाला में आयोजित यह पहला बड़ा मंगलवार धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। श्रद्धालुओं की उपस्थिति और उत्साह ने इस आयोजन को चर्चा का केंद्र बना दिया।