रांची में भर्ती परीक्षा विवाद पर छात्रों का आंदोलन तेज, अनशन जारी, 7 अगस्त को विधानसभा घेराव की चेतावनी

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रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। कई दिनों से चल रहा यह धरना अब और अधिक गंभीर रूप ले चुका है। प्रदर्शन में शामिल छात्र पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन किसी भी स्थिति में समाप्त नहीं किया जाएगा।

आंदोलन के दौरान दो छात्र नेताओं ने आमरण अनशन शुरू किया है। उन्होंने 2 अगस्त से अन्न और जल का त्याग कर अपनी मांगों के समर्थन में विरोध दर्ज कराया है। इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने दोनों छात्रों से वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत की और उन्हें पानी पीने की अपील की। छात्रों ने पानी ग्रहण करने के बाद भी स्पष्ट किया कि उनका अनशन जारी रहेगा और वे अपनी मांगों से पीछे हटने वाले नहीं हैं।

धरना स्थल पर लगातार बड़ी संख्या में छात्र जुट रहे हैं और विभिन्न जिलों से भी युवाओं का समर्थन मिल रहा है। खराब मौसम और बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ। खुले आसमान के नीचे भी छात्र अपने आंदोलन को जारी रखे हुए हैं। आंदोलन से जुड़े कई दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किए जा रहे हैं, जिससे इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर लोगों का ध्यान मिल रहा है।

अनशन पर बैठे छात्रों की तबीयत भी लगातार प्रभावित हो रही है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आने के बाद मेडिकल टीम ने उनका नियमित परीक्षण किया। एक छात्र का ब्लड प्रेशर और शुगर स्तर गिरने पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी अपने आंदोलन को जारी रखने पर अडिग हैं और उनका कहना है कि यह संघर्ष केवल उनके लिए नहीं बल्कि भविष्य के सभी अभ्यर्थियों के हित में है।

छात्रों का आरोप है कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में लंबे समय से पारदर्शिता की कमी रही है। उनका कहना है कि परीक्षा परिणामों, चयन प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक कार्यों को लेकर कई सवाल उठे हैं, जिनका संतोषजनक जवाब अब तक नहीं मिला है। इसी कारण वे पूरी भर्ती व्यवस्था की निष्पक्ष जांच और आवश्यक सुधार की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो।

आंदोलन की पृष्ठभूमि हाल ही में घोषित भर्ती परीक्षा परिणामों से जुड़ी है। परिणाम जारी होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए और निष्पक्षता को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं। सोशल मीडिया पर भी कई दावे सामने आए, जिनके बाद मामले ने व्यापक चर्चा का रूप ले लिया। विवाद बढ़ने पर संबंधित मुख्य परीक्षा को स्थगित कर दिया गया, लेकिन छात्रों का कहना है कि केवल परीक्षा रोक देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांग है कि भर्ती प्रक्रिया में सामने आए सभी आरोपों की स्वतंत्र एजेंसियों से निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जांच समयबद्ध तरीके से पूरी हो और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों तथा संस्थाओं के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए स्पष्ट नियम और जवाबदेही भी तय की जाए।

छात्रों ने यह भी मांग उठाई है कि जिन एजेंसियों या अधिकारियों पर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं, उनकी भूमिका की गहन जांच की जाए। उनका मानना है कि भविष्य में परीक्षाओं का संचालन केवल विश्वसनीय और पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से होना चाहिए ताकि अभ्यर्थियों का विश्वास दोबारा स्थापित किया जा सके। इसके अलावा भर्ती संस्थानों में प्रशासनिक सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने की भी मांग की जा रही है।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो 7 अगस्त को विधानसभा का घेराव किया जाएगा। छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन वे अपने अधिकारों और निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था की मांग को लेकर पीछे नहीं हटेंगे। उनका उद्देश्य केवल वर्तमान विवाद का समाधान नहीं, बल्कि भविष्य में होने वाली सभी भर्ती परीक्षाओं को निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है।