संसद में पेपर लीक कानून पर आज बड़ी बहस: स्पीकर की सदन चलाने की अपील, राहुल-प्रियंका दोपहर में रखेंगे पक्ष

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संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही हंगामे के बीच शुरू हुई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सभी दलों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि संसद लोकतांत्रिक चर्चा का मंच है और यहां सार्थक संवाद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलना देशहित में जरूरी है और इससे जनता के बीच सकारात्मक संदेश जाता है। लगातार नारेबाजी और विरोध के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

दोपहर 2 बजे लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक को रोकने से जुड़े ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा होगी। यह विधेयक 2024 में लागू किए गए कानून में बदलाव प्रस्तावित करता है। लोकसभा अध्यक्ष ने इस पर चर्चा के लिए छह घंटे का समय निर्धारित किया है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर बढ़ाया भी जा सकता है। सरकार इस विधेयक को परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है।

सत्तापक्ष की ओर से कई युवा सांसद इस बहस में हिस्सा लेंगे। भारतीय जनता पार्टी की बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या सहित अन्य सांसद परीक्षा प्रणाली में सुधार, तकनीकी निगरानी और संगठित नकल गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई जैसे मुद्दे उठाएंगे। एनडीए के नेताओं का कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में कठोर कानून की आवश्यकता है और परीक्षा प्रक्रिया में विश्वास बहाल करना सरकार की प्राथमिकता है।

विपक्षी गठबंधन INDIA की ओर से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चर्चा में शामिल होंगे। सूत्रों के अनुसार विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल और गौरव गोगोई लोकसभा में अपना पक्ष रखेंगे। कांग्रेस का कहना है कि वह पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून के खिलाफ नहीं है, लेकिन केवल कानून बनाने से समस्या समाप्त नहीं होगी। विपक्ष परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही, प्रशासनिक विफलताओं और छात्रों के हितों की सुरक्षा जैसे मुद्दों को भी उठाने की तैयारी में है।

विपक्ष ने यह भी कहा है कि संसद में विधेयक पर चर्चा शुरू होने से पहले सरकार को उन छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर जवाब देना चाहिए, जो पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। विपक्षी नेताओं का कहना है कि छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी चिंताओं को सुना जाना चाहिए। INDIA गठबंधन की बैठक में इस मुद्दे पर संयुक्त रणनीति बनाई गई और यह तय किया गया कि परीक्षा सुधार के साथ-साथ छात्रों के अधिकारों का प्रश्न भी जोरदार तरीके से उठाया जाएगा।

राज्यसभा में भी इसी मुद्दे को लेकर तीखा हंगामा देखने को मिला। विपक्षी सांसदों ने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया और सरकार से विस्तृत बयान की मांग की। सभापति ने शून्यकाल चलाने की कोशिश की, लेकिन लगातार शोर-शराबे के कारण कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। मानसून सत्र शुरू होने के बाद से पेपर लीक का मुद्दा राज्यसभा में लगातार टकराव का प्रमुख कारण बना हुआ है।

संसद परिसर में एनडीए सांसदों ने पंजाब में परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर प्रदर्शन भी किया। उन्होंने पंजाब के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई। यह विरोध हाल में एक विश्वविद्यालय परीक्षा के दौरान सामने आए नकल प्रकरण को लेकर किया गया। सत्तापक्ष का कहना है कि राज्यों में भी परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए कठोर कदम उठाए जाने चाहिए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।

मंगलवार सुबह संसद भवन में एनडीए संसदीय दल की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक भी आयोजित हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों को संबोधित किया और संसद सत्र के दौरान सरकार की रणनीति पर चर्चा की। इस बैठक में पहली बार नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के सांसदों को भी आमंत्रित किया गया। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर इस दल में शामिल हुए कई सांसद बैठक में मौजूद रहे। बैठक में अमित शाह, राजनाथ सिंह और अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए।

पेपर लीक के बढ़ते मामलों ने देश की परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पिछले कुछ वर्षों में भर्ती परीक्षाओं, प्रवेश परीक्षाओं और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के कई मामले सामने आए हैं। इन्हीं घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने 2024 में सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम संबंधी कानून लागू किया था। नए संशोधन के माध्यम से सरकार दंडात्मक प्रावधानों को और प्रभावी बनाने, संगठित गिरोहों पर शिकंजा कसने तथा परीक्षा संस्थाओं की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

नीट-यूजी 2026 विवाद के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया। परीक्षा रद्द होने, दोबारा परीक्षा कराने और जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद छात्रों में व्यापक असंतोष देखा गया। मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों द्वारा की जा रही है और कई राज्यों में छापेमारी तथा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। संसद में आज होने वाली बहस को केवल एक विधेयक पर चर्चा नहीं, बल्कि देश की पूरी परीक्षा व्यवस्था, युवाओं के भविष्य, संस्थागत जवाबदेही और लोकतांत्रिक संवाद की कसौटी के रूप में देखा जा रहा है।