आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़े बहुचर्चित मामले में पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों की सजा पर फैसला फिलहाल टल गया है। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट में इस मामले में सजा तय किए जाने को लेकर बहस होनी थी, लेकिन ताहिर हुसैन की ओर से समय मांगे जाने के बाद अदालत ने सुनवाई को 27 जुलाई तक स्थगित कर दिया। अब अगली तारीख पर सभी पक्ष सजा के संबंध में अपनी दलीलें विस्तार से अदालत के सामने रखेंगे, जिसके बाद कोर्ट उचित निर्णय लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने केवल अगली तारीख तय करने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि सभी दोषियों के वकीलों को उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति से संबंधित हलफनामा भी दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सजा तय करते समय दोषियों की व्यक्तिगत, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों पर भी विचार किया जाएगा। इसी उद्देश्य से अदालत ने यह जानकारी रिकॉर्ड पर उपलब्ध कराने को कहा, ताकि सजा निर्धारण के समय सभी जरूरी तथ्यों का मूल्यांकन किया जा सके।
इससे पहले 13 जुलाई को कड़कड़डूमा कोर्ट ने लंबी सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन, नाजिम, काशिम, अनस और जावेद को हत्या, अपहरण, दंगा और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में दोषी करार दिया था। वहीं इसी मामले में आरोपी बनाए गए कुल 11 लोगों में से छह आरोपियों को अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के आधार पर बरी कर दिया था। अदालत का यह फैसला कई वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद सामने आया।
यह मामला आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़ा है, जिनकी मौत फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान हुई थी। घटना वाले दिन अंकित शर्मा अपने कार्यालय से घर लौटे थे, लेकिन कुछ समय बाद दोबारा बाहर निकले और फिर वापस नहीं लौटे। परिवार के सदस्यों ने काफी देर तक उनकी तलाश की, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल सका। बाद में इलाके के लोगों से सूचना मिलने के बाद पुलिस को उनके लापता होने की जानकारी दी गई और खोजबीन तेज कर दी गई।
अगले दिन पुलिस ने चांदबाग पुलिया के पास स्थित खजूरी खास नाले से अंकित शर्मा का शव बरामद किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर बड़ी संख्या में गंभीर चोटों के निशान पाए गए, जिसने इस घटना की गंभीरता को और बढ़ा दिया। शव मिलने के बाद पूरे मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा का विषय बना और पुलिस ने हत्या सहित अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
मामले की शिकायत अंकित शर्मा के पिता रविंदर कुमार ने दयालपुर थाने में दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे की हत्या तत्कालीन AAP पार्षद ताहिर हुसैन और उनके सहयोगियों ने की। शिकायत के अनुसार घटना के समय आरोपी एक स्थान पर इकट्ठा थे और हत्या के बाद अंकित शर्मा के शव को नाले में फेंक दिया गया। इन्हीं आरोपों के आधार पर पुलिस ने विस्तृत जांच शुरू की और विभिन्न गवाहों, दस्तावेजों तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को एकत्रित किया।


जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया, जिसके आधार पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी। 24 मार्च 2023 को अदालत ने ताहिर हुसैन सहित कुल 11 आरोपियों के खिलाफ हत्या, अपहरण, दंगा और अन्य गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय किए। इसके बाद कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए, दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्यों की जांच हुई तथा दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
करीब कई वर्षों तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का मूल्यांकन करते हुए पांच आरोपियों को दोषी ठहराया, जबकि छह अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अब न्यायिक प्रक्रिया का अगला चरण दोषियों की सजा तय करने का है, जिसमें अदालत अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों के साथ-साथ दोषियों की व्यक्तिगत परिस्थितियों को भी ध्यान में रखकर अंतिम निर्णय सुनाएगी।
यह पूरा मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा की पृष्ठभूमि से जुड़ा है। उस समय नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन और विरोध के दौरान कई इलाकों में तनाव बढ़ गया था, जिसके बाद हिंसा ने व्यापक रूप ले लिया। कई दिनों तक चली इस हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई, सैकड़ों लोग घायल हुए और अनेक घरों, दुकानों तथा अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचा। इसी हिंसा के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या का मामला सामने आया, जिसकी जांच और सुनवाई पिछले कई वर्षों से अदालत में चल रही थी।
अब इस मामले में अदालत 27 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई के दौरान दोषियों की सजा को लेकर विस्तृत बहस सुनेगी। इसके बाद अदालत अभियोजन पक्ष, बचाव पक्ष, उपलब्ध साक्ष्यों, अपराध की प्रकृति तथा दोषियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति सहित सभी संबंधित पहलुओं पर विचार करते हुए सजा को लेकर अंतिम फैसला सुनाएगी। इस कारण अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस बहुचर्चित मामले में न्यायिक प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण चरण पूरा होने की उम्मीद की जा रही है।

