CJP संसद मार्च हिंसा पर दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन, 10 FIR दर्ज; सुरक्षा बढ़ी, बंगाल से 2000 CRPF जवान तैनात

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन लगातार जारी है और प्रदर्शन का यह क्रम अब एक महीने से अधिक समय पार कर चुका है। हाल के दिनों में हुए संसद मार्च के बाद राजधानी का राजनीतिक और सुरक्षा माहौल काफी बदल गया है। प्रदर्शनकारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अब भी डटे हुए हैं और बड़ी संख्या में देश के अलग-अलग राज्यों से समर्थक जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं। आंदोलन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है, जिसके चलते प्रशासन भी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।

20 जुलाई को आयोजित संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 10 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। इन मामलों को राजधानी के विभिन्न थानों में दर्ज किया गया है और आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों पर हमला किया, पथराव किया, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया तथा कानून-व्यवस्था में बाधा डालने की कोशिश की। पुलिस पूरे घटनाक्रम से जुड़े वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है ताकि हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।

सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने भी व्यापक कदम उठाए हैं। गृह मंत्रालय के निर्देश पर पश्चिम बंगाल से सीआरपीएफ की अतिरिक्त 20 कंपनियों को दिल्ली बुलाया गया है। एक कंपनी में लगभग 100 जवान होने के कारण करीब 2000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जा रही है। इन जवानों को एयरलिफ्ट कर राजधानी लाया जा रहा है ताकि संसद के मानसून सत्र और जंतर-मंतर के आसपास किसी भी अप्रिय स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। इससे पहले भी राजधानी में CRPF और RAF की कई कंपनियां सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही थीं।

राजधानी के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा को देखते हुए संसद भवन और उसके आसपास के क्षेत्रों में बैरिकेडिंग बढ़ा दी गई है। पुलिस ने कई प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं और आने-जाने वाले लोगों की निगरानी भी तेज कर दी गई है। प्रशासन का कहना है कि आम लोगों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है, इसलिए किसी भी प्रकार की हिंसक गतिविधि या अव्यवस्था को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सोनम वांगचुक का मुद्दा भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। लंबे समय से चल रहे उनके अनशन के बाद स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उन्हें पहले सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था और बाद में दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार उन्हें गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसी दौरान खबर सामने आई कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने अस्पताल पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की। हालांकि इस मुलाकात को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई, लेकिन इसे आंदोलन और सरकार के बीच संवाद की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।

दिल्ली हाईकोर्ट में भी इस पूरे मामले को लेकर महत्वपूर्ण सुनवाई निर्धारित है। अदालत के समक्ष दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। याचिका में यह भी मांग की गई है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ कानून की प्रक्रिया का पालन किए बिना कोई कठोर कार्रवाई न की जाए। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि उसकी कार्रवाई केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थी।

कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं ने पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जा रहा है और कानूनी मामलों से आंदोलन को रोका नहीं जा सकता। उनका दावा है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है तो आने वाले दिनों में देशभर से और अधिक लोग दिल्ली पहुंचेंगे तथा आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। संगठन का कहना है कि वह अपने कार्यक्रमों को शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखेगा।

संसद मार्च के दौरान घायल हुए कुछ प्रदर्शनकारियों की स्थिति को लेकर भी चिंता बनी हुई है। कई लोगों को गंभीर चोटें आने की जानकारी सामने आई है और कुछ घायलों का इलाज राजधानी के विभिन्न अस्पतालों में जारी है। प्रदर्शनकारी संगठनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग किया गया, जबकि पुलिस का कहना है कि भीड़ को नियंत्रित करने और स्थिति को सामान्य बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए थे। इन आरोपों और जवाबों के बीच पूरे घटनाक्रम की जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

घटना के बाद कई राजनीतिक दलों और विपक्षी नेताओं ने भी जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों के प्रति समर्थन व्यक्त किया। विभिन्न नेताओं ने आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं पर चिंता जताई और सरकार से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की। दूसरी ओर सरकार की ओर से अब तक कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देने की बात कही जा रही है। राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के चलते यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा का विषय बन चुका है।

फिलहाल राजधानी दिल्ली में स्थिति पर प्रशासन की लगातार नजर बनी हुई है। एक ओर पुलिस हिंसा से जुड़े मामलों की जांच कर रही है और आरोपियों की पहचान में जुटी है, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती, न्यायालय में चल रही सुनवाई, सोनम वांगचुक से जुड़ी घटनाएं और सरकार तथा आंदोलनकारियों के बीच संभावित संवाद—इन सभी कारणों से यह मामला आने वाले दिनों में भी राष्ट्रीय राजनीति और कानून-व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण बना रहने की संभावना है।