कर्नाटक में सूखे का गंभीर संकट: 178 ताल्लुकों में पानी की कमी, डीके शिवकुमार सरकार ने शुरू की राहत की तैयारी

You are currently viewing कर्नाटक में सूखे का गंभीर संकट: 178 ताल्लुकों में पानी की कमी, डीके शिवकुमार सरकार ने शुरू की राहत की तैयारी

कर्नाटक इस समय गंभीर सूखे के संकट से जूझ रहा है। राज्य में मानसून की कमी के कारण पानी की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है और कई इलाकों में लोगों को पीने के पानी के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार के अनुसार, इस सीजन में करीब 60 फीसदी तक बारिश की कमी दर्ज की गई है, जिसके चलते 178 ताल्लुक सूखे जैसे हालात की चपेट में आ गए हैं। इनमें कई ऐसे इलाके भी शामिल हैं जहां बारिश बेहद कम हुई है और कुछ क्षेत्रों में लगभग शून्य बारिश दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सूखे की स्थिति को देखते हुए उच्च स्तरीय बैठक कर अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सूखे की वास्तविक स्थिति जानने के लिए अधिकारी सिर्फ कार्यालयों में बैठकर रिपोर्ट तैयार न करें, बल्कि गांवों, खेतों और प्रभावित इलाकों में जाकर जमीनी हालात का निरीक्षण करें। अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर केंद्र सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है, ताकि राज्य को अतिरिक्त सहायता मिल सके।

बारिश की कमी का असर राज्य के जल संसाधनों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कई बांधों और जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से घटा है। सरकार ने फैसला लिया है कि उपलब्ध जल भंडार का इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर पीने के पानी के लिए किया जाएगा। किसानों से भी अपील की गई है कि पानी की उपलब्धता को देखते हुए नई फसलों की बुवाई करने में सावधानी बरतें।

सूखे से निपटने के लिए कर्नाटक सरकार ने राहत कार्यों को तेज कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था मजबूत करने के लिए विशेष बजट जारी किया गया है। प्रत्येक ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में पीने के पानी की समस्या दूर करने के लिए राशि उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा सूखा प्रभावित जिलों में राहत और आवश्यक कार्यों के लिए कुल ₹379 करोड़ जारी किए गए हैं।

सरकार ने नए बोरवेल की खुदाई और पेयजल योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए भी सख्त कदम उठाए हैं। नए बोरवेल से जुड़े कामों की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य की गई है, ताकि काम में किसी तरह की गड़बड़ी न हो। अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में मौजूद रहकर पानी की समस्या और राहत कार्यों की निगरानी करें।

कर्नाटक के ग्रामीण इलाकों में सूखे का असर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। कई तालाबों में पानी की मात्रा काफी कम हो चुकी है और पशुओं व आम लोगों के लिए पानी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन गई है। सरकार का कहना है कि फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराना और सूखे से प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाना है।

अब सभी की नजर केंद्र सरकार को भेजी जाने वाली सूखे की रिपोर्ट और उसके बाद मिलने वाली सहायता पर है। कर्नाटक सरकार उम्मीद कर रही है कि जमीनी स्थिति के आधार पर राज्य को जरूरी आर्थिक मदद मिलेगी, जिससे पानी संकट और सूखे की स्थिति से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके।