आतंकी नेटवर्क पर बड़ा प्रहार: चार राज्यों तक फैले स्लीपर सेल की साजिश बेनकाब, सेकंड हेड कमांडर समेत तीन गिरफ्तार

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भोपाल में मध्यप्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) की हालिया कार्रवाई के बाद एक ऐसे कथित आतंकी नेटवर्क की जांच तेज हो गई है, जिसके तार कई राज्यों तक जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। राजधानी के काजी कैंप क्षेत्र से गिरफ्तार मोहम्मद फराज से पूछताछ के दौरान मिले इनपुट के आधार पर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से नईम को भी हिरासत में लिया गया। दोनों से पूछताछ में सामने आई जानकारियों के बाद जांच एजेंसियों ने राजस्थान, हरियाणा और मध्यप्रदेश के अन्य इलाकों में भी कार्रवाई शुरू की है।

एटीएस के अनुसार, जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाने का प्रयास कर रहे थे। इसी कड़ी में राजस्थान के अलवर जिले से शाकिर मेव को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियां उसे नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला व्यक्ति मान रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि शाकिर मेव कथित तौर पर संगठनात्मक गतिविधियों के समन्वय और अन्य सदस्यों से संपर्क बनाए रखने में सक्रिय था। फिलहाल उससे रिमांड के दौरान विस्तृत पूछताछ की जा रही है।

पूछताछ में यह भी संकेत मिले हैं कि नेटवर्क को देश के बाहर बैठे कुछ संदिग्ध हैंडलरों से निर्देश प्राप्त हो रहे थे। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन संपर्कों का उद्देश्य क्या था और इनके माध्यम से किस प्रकार की गतिविधियों को संचालित किया जा रहा था। साथ ही, विदेशी फंडिंग की आशंका को देखते हुए आर्थिक लेन-देन और बैंकिंग रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

मामले की जांच के दौरान धार निवासी हाजी अहजर को भी गिरफ्तार किया गया है, जबकि हरियाणा के नूंह से हिरासत में लिए गए एक युवक से पूछताछ जारी है। अधिकारियों का मानना है कि इन संदिग्धों के बीच लंबे समय से संपर्क बना हुआ था और वे अलग-अलग क्षेत्रों में नेटवर्क तैयार करने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि जांच एजेंसियां अभी सभी तथ्यों का सत्यापन कर रही हैं और कई पहलुओं पर जांच जारी है।

एटीएस ने आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है। जांचकर्ताओं का ध्यान विशेष रूप से उन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और चैट ग्रुप्स पर है, जिनके जरिए कथित तौर पर नए लोगों को जोड़ा जा रहा था। शुरुआती जांच में कुछ संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट और मैसेजिंग ग्रुप सामने आए हैं, जिनकी गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है।

जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरे मामले में अभी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आना बाकी हैं। आने वाले दिनों में पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के आधार पर नेटवर्क के आकार, उसके संभावित विदेशी संपर्कों और फंडिंग के स्रोतों को लेकर और बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल एटीएस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां संयुक्त रूप से मामले की जांच में जुटी हुई हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।