मिडिल ईस्ट जंग की वजह से दुनियाभर में तेल-गैस की सप्लाई बाधित हुई. फरवरी से शुरू हुई जंग अभी खत्म नहीं हुई है और न ही अभी तक कोई समाधान निकला है. देश में एलपीजी को लेकर कई नियम बनाए गए हैं. हालांकि सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है. मिडिल ईस्ट जंग शुरू होने के बाद तेल-गैस कंपनियों ने घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए थे. माना जा रहा है कि एक बार फिर 1 मई से गैस की कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है.
आमतौर पर लगभग तेल-गैस कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को कीमत में बदलाव करती हैं. लेकिन यह उतार-चढ़ाव मामूली सी रहती है. संभावना है कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद कीमतों में उछाल देखने को मिल सकती है. हालांकि, इसको लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. होर्मुज, जहां से तेल-गैस की सप्लाई होती है. वह रास्ता काफी समय से बंद है. होर्मुज के बंद होने से ही तेल-गैस की सप्लाई पर असर पड़ा है. अगर यह तनाव लंबे समय तक रहा, तो आगे भी परेशानी होने की आशंका है.
बुकिंग नियमों में बदलाव की तैयारी
एलपीजी की कमी को देखते हुए सरकार बुकिंग के नियमों में भी बड़े बदलाव करने की तैयारी में है. वर्तमान में शहरी क्षेत्रों में दो रिफिल के बीच 25 दिनों और गांवों में 45 दिन के अंतर की समयसीमा तय है. एलपीजी गैस बुकिंग के नियम को कुछ दिनों तक और स्थाई रखा जा सकता है. यानी अभी राहत मिलते नहीं दिखाई दे रहा है.