मध्य प्रदेश विधानसभा: बजट सत्र के आठवें दिन गोवंश, अदाणी कोल माइंस और मास्टर प्लान पर गरमाया सदन, सरकार-विपक्ष आमने-सामने!

You are currently viewing मध्य प्रदेश विधानसभा: बजट सत्र के आठवें दिन गोवंश, अदाणी कोल माइंस और मास्टर प्लान पर गरमाया सदन, सरकार-विपक्ष आमने-सामने!

मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का आठवां दिन विभिन्न जनहित और विकास से जुड़े विषयों पर तीखी नोकझोंक के साथ गुजरा। निराश्रित गोवंश की समस्या, सिंगरौली में अदाणी समूह की कोल माइंस के लिए पेड़ कटाई, इंदौर के मास्टर प्लान में देरी और राज्य में पुल निर्माण से जुड़े विवादों ने सदन की कार्यवाही को गरमाए रखा।

इंदौर मास्टर प्लान को लेकर आरोप-प्रत्यारोप

कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने इंदौर के मास्टर प्लान को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि मंत्री द्वारा यह कहना कि मास्टर प्लान तैयार कर मुख्यमंत्री को सौंप दिया गया है और अब वह मुख्यमंत्री के पास लंबित है, दुर्भाग्यपूर्ण है। शेखावत के अनुसार, मंत्री और मुख्यमंत्री के बीच के मतभेद में इंदौर जैसे ऐतिहासिक शहर का मास्टर प्लान अटका हुआ है।

पुल निर्माण पर विपक्ष का सवाल

तराना से विधायक महेश परमार ने लोक निर्माण विभाग पर निशाना साधते हुए कहा कि जब से राकेश सिंह पीडब्ल्यूडी मंत्री बने हैं, तब से पुल टूटने के मामलों में रिकॉर्ड बन रहा है। उन्होंने भोपाल में बने 90 डिग्री एंगल के ब्रिज का जिक्र करते हुए कहा कि मंत्री का यह तर्क कि देश में ऐसे कई पुल हैं, पर्याप्त नहीं है। परमार ने पूछा कि यदि पुल सही बना था तो संबंधित अधिकारियों को प्रोत्साहन क्यों नहीं दिया गया और उन्हें निलंबित क्यों किया गया।

निराश्रित गोवंश पर चिंता और सरकार का जवाब

कार्यवाही के दौरान कांग्रेस विधायक अजय सिंह ने निराश्रित गोवंश के कारण किसानों की फसलों को हो रहे नुकसान और यातायात बाधित होने की समस्या उठाई। उन्होंने कहा कि किसान इस दुविधा में हैं कि वे अपनी फसल की रखवाली करें या निराश्रित गोवंश को खेतों से दूर भगाते फिरें। उन्होंने बताया कि किसान रात में टॉर्च लेकर खेतों में गोवंश को हटाने को मजबूर हैं।

कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने कहा कि निराश्रित गोवंश से परेशान होकर किसान खेतों में करंट लगा देते हैं, जिससे अनजाने में गोवंश की मौत हो जाती है और कई बार बच्चे भी इसकी चपेट में आ जाते हैं।

इस पर पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने जवाब देते हुए कहा कि 25 जिलों में गौशालाओं के लिए स्थान चिह्नित किए गए हैं। जबलपुर, रायसेन, दमोह, सागर, अशोकनगर, खरगोन और रीवा में टेंडर जारी हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि प्रत्येक स्थान पर कम से कम 5 हजार गोवंश रखने की व्यवस्था होगी। वर्तमान में लगभग 10 लाख निराश्रित गोवंश बेसहारा हैं, जिनमें से 4 लाख को नई व्यवस्था के बाद सुरक्षित किया जा सकेगा।

सिंगरौली में कोल माइंस और पेड़ कटाई पर टकराव

सिंगरौली में अदाणी समूह की कोल माइंस के लिए प्रस्तावित पेड़ कटाई को लेकर भी सदन में तीखी बहस हुई। कांग्रेस विधायक सेना पटेल ने आरोप लगाया कि भाजपा जंगलों और आदिवासियों को उजाड़ना चाहती है। कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा कि भाजपा अदाणी जी के पास गिरवी रखी हुई है और जब भी कांग्रेस अदाणी पर आरोप लगाती है, भाजपा नेताओं को आपत्ति होने लगती है।

इसके जवाब में भाजपा विधायक रामनिवास शाह ने कहा कि पेड़ कटाई से सिंगरौली को एक पैसे का भी नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कोल माइंस के लिए पेड़ काटना आवश्यक है, क्योंकि बिना कोयले के बिजली और बिना बिजली के पानी संभव नहीं है। शाह ने यह भी कहा कि चर्चा का केंद्र पेड़ कटाई नहीं, बल्कि विस्थापन और मुआवजे का मुद्दा होना चाहिए, जिस पर सरकार काम कर रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि खदानें नीलामी प्रक्रिया के तहत दी जाती हैं और अदाणी के अलावा एस्सार, जेपी और नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड जैसी कंपनियां भी वहां कार्यरत हैं।

बहसों के बीच जारी रहा बजट सत्र

आठवें दिन की कार्यवाही में विकास, पर्यावरण, कृषि और आधारभूत संरचना से जुड़े मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच स्पष्ट मतभेद देखने को मिले। विभिन्न विषयों पर उठे सवालों और दिए गए जवाबों के बीच सदन की कार्यवाही बहस और हंगामे के साथ आगे बढ़ती रही।