खरगोन आरक्षक पिटाई प्रकरण : 30 घंटे के धरने के बाद आदिवासी समाज ने खत्म किया आंदोलन, अधिकारी निलंबित, जांच जारी

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जनतंत्र, मध्यप्रदेश, श्रुति घुरैया:

मध्यप्रदेश के खरगोन में आरक्षक राहुल चौहान की कथित पिटाई मामले ने पुलिस महकमे और प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इस घटना को लेकर आदिवासी समाज और कांग्रेस सहित कई संगठनों ने करीब 30 घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। मामला तब शांत हुआ जब प्रशासन ने आरक्षक की मेडिकल जांच और पत्नी के बयान दर्ज करवाने का आश्वासन दिया। हालांकि, मेडिकल रिपोर्ट को गोपनीय रखा गया है और इसे सीधे कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा।

घटना कैसे हुई

23 अगस्त की रात को यह पूरा मामला सामने आया, जब खरगोन में पदस्थ आरक्षक राहुल चौहान को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी आरआई सौरभ कुशवाहा के शासकीय निवास पर बुलाया गया। आरोप है कि कुशवाहा ने अपने कुत्ते के गुम होने पर गुस्से में आकर आरक्षक राहुल की बेल्ट और चप्पल से पिटाई कर दी। राहुल का कहना है कि इस दौरान उनके साथ जातिसूचक शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया। घटना के बाद राहुल का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह अपने शरीर पर चोटों के निशान दिखाते हुए न्याय की गुहार लगाते नजर आए।

घटना के बाद आदिवासी संगठन जय आदिवासी युवा शक्ति (JAYS) के कार्यकर्ताओं ने हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। कांग्रेस के तीन विधायक भी धरने में शामिल हुए और प्रशासन पर दबाव बनाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि केवल निलंबन से मामले की गंभीरता कम नहीं होती, बल्कि इस प्रकरण में SC/ST एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।

मेडिकल जांच और पत्नी के बयान के बाद धरना समाप्त

धरनास्थल पर मौजूद आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने साफ कर दिया कि जब तक मेडिकल जांच और राहुल की पत्नी के बयान दर्ज नहीं होते, आंदोलन खत्म नहीं होगा। प्रशासन ने दोनों मांगें मानीं। जिला अस्पताल में राहुल की मेडिकल जांच कराई गई, लेकिन डॉक्टर ने रिपोर्ट को गोपनीय बताते हुए सार्वजनिक टिप्पणी करने से इनकार किया। दूसरी ओर, राहुल की पत्नी जयश्री ने थाने में अपना बयान दर्ज कराया और चेतावनी दी कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेंगी। इस आश्वासन के बाद आंदोलनकारी पीछे हटे और धरना खत्म हुआ।

अधिकारी सस्पेंड, जांच की प्रक्रिया शुरू

पुलिस अधीक्षक और एसडीओपी की निगरानी में आरोपित आरआई सौरभ कुशवाहा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने आदिवासी समाज को भरोसा दिलाया है कि निष्पक्ष जांच होगी और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अब भी एफआईआर की मांग पर अड़े संगठन

हालांकि, आंदोलन खत्म होने के बाद भी आदिवासी संगठन एफआईआर दर्ज करने की मांग पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक SC/ST एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज नहीं होता, तब तक न्याय अधूरा रहेगा। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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