पासपोर्ट पर थरूर का सरकार पर निशाना: बोले- नागरिकता को लेकर बढ़ रहा भ्रम, पासपोर्ट और आधार को मिले वैध प्रमाण का दर्जा

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्र सरकार के उस स्पष्टीकरण पर सवाल उठाए हैं, जिसमें कहा गया है कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं बल्कि केवल विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला आधिकारिक दस्तावेज है। थरूर ने इस स्थिति को आम लोगों के लिए भ्रम पैदा करने वाला बताया और इसे कानूनी दृष्टि से विरोधाभासी करार दिया।

उन्होंने कहा कि वर्षों से भारतीय पासपोर्ट को सबसे भरोसेमंद सरकारी दस्तावेज माना जाता रहा है। यदि यही दस्तावेज देश के भीतर नागरिकता साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जाएगा, तो आम नागरिकों के सामने यह सवाल खड़ा होगा कि आखिर नागरिकता साबित करने के लिए कौन-सा प्रमाण मान्य होगा।

विदेश मंत्रालय ने 24 जून को जारी अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को वैध बनाना है और इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसी तरह पहले भी सुप्रीम कोर्ट आधार कार्ड को केवल पहचान का दस्तावेज बता चुका है, न कि नागरिकता का प्रमाण।

शशि थरूर ने सुझाव दिया कि जब तक किसी व्यक्ति का पासपोर्ट या आधार कार्ड सरकार द्वारा रद्द या वापस नहीं लिया जाता, तब तक इन दोनों दस्तावेजों को नागरिकता के पर्याप्त प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे नागरिकों को अनावश्यक कानूनी और प्रशासनिक परेशानियों से राहत मिलेगी।

उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) विदेशी नागरिकों या गैर-भारतीय निवासियों के लिए अलग श्रेणी का आधार कार्ड जारी करे। इससे भारतीय नागरिकों के आधार कार्ड और पासपोर्ट की वैधता को लेकर किसी प्रकार का भ्रम नहीं रहेगा और प्रशासनिक प्रक्रिया भी अधिक स्पष्ट होगी।

इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। भाजपा नेता अमित मालवीय ने कहा कि सरकार ने कोई नया नियम लागू नहीं किया है, बल्कि यह व्यवस्था पहले से ही पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के प्रावधानों के अनुरूप लागू है। उनके अनुसार विशेष परिस्थितियों में सरकार गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी कर सकती है।

वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी सवाल उठाया कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है तो फिर नागरिकता सिद्ध करने के लिए कौन-सा दस्तावेज अंतिम माना जाएगा। वहीं, गीतकार जावेद अख्तर ने भी विदेश मंत्रालय के इस स्पष्टीकरण को तर्कसंगत नहीं बताते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि पिछले एक दशक में देशभर में पासपोर्ट सेवा केंद्रों और संबंधित सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया गया है। चिप आधारित ई-पासपोर्ट का वितरण लगातार बढ़ रहा है और आवेदन प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी तेज हुई है, जिससे लोगों को पासपोर्ट सेवाएं आसानी से मिल रही हैं।

इसी बीच केंद्र सरकार ने 1 जुलाई से पासपोर्ट बनवाने और री-इश्यू कराने की फीस बढ़ाने का फैसला भी किया है। सामान्य और तत्काल दोनों श्रेणियों के पासपोर्ट शुल्क में बढ़ोतरी की गई है। मंत्रालय के अनुसार पासपोर्ट नियमों में संशोधन के बाद नई शुल्क दरें लागू होंगी, जो लगभग 14 वर्षों बाद संशोधित की गई हैं।