उज्जैन जिले के बड़नगर में मोहर्रम जुलूस के दौरान क्रेन से हवा में लटकाई गई मैजिक वैन में हुए विस्फोट के मामले की जांच अब तेज हो गई है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद एटीएस, फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) और बम निरोधक दस्ता सक्रिय होकर मामले की तह तक पहुंचने में जुट गए हैं।
घटना के दूसरे ही दिन शुक्रवार सुबह जांच एजेंसियों की टीमें बड़नगर थाने पहुंचीं। अधिकारियों ने जब्त की गई मैजिक वैन का बारीकी से निरीक्षण किया और मौके से मिले सभी अहम साक्ष्यों को सुरक्षित किया। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि विस्फोट किन परिस्थितियों में हुआ।
फोरेंसिक विशेषज्ञों ने वाहन से जले हुए पटाखों के अवशेष, वायरिंग और अन्य संदिग्ध सामग्री के नमूने एकत्र किए हैं। इन सैंपलों की प्रयोगशाला में जांच की जाएगी, जिससे विस्फोट में इस्तेमाल हुई सामग्री की सही जानकारी सामने आ सके।
जांच एजेंसियां जुलूस के दौरान वाहन पर लिखे गए ‘ले फिर आ गए’ संदेश और लहराए गए बैनरों की भी पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन संदेशों के पीछे की मंशा को समझना जांच का अहम हिस्सा हो सकता है। इसके साथ ही संबंधित लोगों की पृष्ठभूमि भी खंगाली जा रही है।
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने दावा किया है कि विस्फोट केवल पटाखों की मदद से किया गया था। उन्होंने करीब आठ हजार रुपये के पटाखे खरीदने से जुड़े दस्तावेज भी पुलिस को सौंपे हैं, जिनकी सत्यता की जांच जारी है।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि विस्फोट के समय जाहिद और तस्लीम उर्फ नेहरू मैजिक वाहन के भीतर मौजूद थे। ब्लास्ट के बाद दोनों को जुलूस में झंडे लहराते हुए भी देखा गया, जिसके वीडियो और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
क्रेन उपलब्ध कराने वाले श्री सांवरिया क्रेन सर्विस के संचालक गोपाल राठौर ने बताया कि उनसे केवल पुष्प वर्षा के लिए क्रेन किराए पर मांगी गई थी। तय किराए पर चालक सहित क्रेन भेजी गई, लेकिन मौके पर पहुंचने के बाद आयोजकों ने उसी क्रेन से मैजिक वाहन को लटकाकर विस्फोट कर दिया। उनका कहना है कि उन्हें इसकी पहले से कोई जानकारी नहीं थी।
पुलिस ने मामले में शोएब, जाहिद और तस्लीम उर्फ नेहरू को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल के साथ फ्लैग मार्च भी निकाला गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, घटना ऐसे स्थान पर हुई जहां उस समय बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। विस्फोट के कारण कांच के टुकड़े दूर-दूर तक बिखर गए थे। चूंकि क्षेत्र पहले से संवेदनशील माना जाता है, इसलिए एटीएस को भी जांच में शामिल किया गया है। अब फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि विस्फोट केवल पटाखों से हुआ था या इसमें किसी अन्य विस्फोटक या रासायनिक पदार्थ का भी उपयोग किया गया था।