मध्यप्रदेश में भाजपा ने अपने 47वें स्थापना दिवस को सिर्फ एक औपचारिक आयोजन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे संगठन विस्तार और कार्यकर्ताओं से जुड़ाव का बड़ा दिन बना दिया। भोपाल स्थित प्रदेश कार्यालय में मुख्य कार्यक्रम हुआ, जहां से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने एक साथ 17 जिलों में नए पार्टी कार्यालयों के निर्माण की शुरुआत कराई। इस दौरान प्रदेशभर के कार्यकर्ता वर्चुअली जुड़े और कार्यक्रम को लाइव देखा।
सीएम मोहन यादव ने अपने संबोधन में संगठन की ताकत और देश की बदलती स्थिति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज भारत पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुआ है और अब देश अपनी सुरक्षा को लेकर किसी पर निर्भर नहीं है। उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि समय बदल चुका है—अब भारत जरूरत पड़ने पर अपने दुश्मनों को उनके घर में घुसकर जवाब देने की क्षमता रखता है।
भाजपा की विचारधारा पर बात करते हुए सीएम ने कहा कि यह सिर्फ एक पार्टी नहीं, बल्कि एक सतत चलने वाली सोच है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे फीनिक्स पक्षी राख से फिर खड़ा हो जाता है, वैसे ही भाजपा ने हर दौर में खुद को और मजबूत किया है। अटल बिहारी वाजपेयी के समय का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गठबंधन की सरकार में भी पार्टी ने अपने मूल सिद्धांतों को नहीं छोड़ा।
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संगठन के भविष्य का रोडमैप सामने रखा। उन्होंने साफ कहा कि लक्ष्य है—अगले स्थापना दिवस तक प्रदेश के सभी 52 जिलों में भाजपा के अपने कार्यालय हों। फिलहाल 17 जिलों में इसकी शुरुआत हो चुकी है। इन नए कार्यालयों को सिर्फ दफ्तर नहीं, बल्कि संगठन के एक्टिव सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां डिजिटल सुविधाएं और पुस्तकालय भी होंगे।
कार्यक्रम में एक भावुक पल भी देखने को मिला, जब पार्टी के दिवंगत नेताओं और कार्यकर्ताओं के परिजनों का सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री खुद मंच से उतरकर उनके बीच पहुंचे, जिससे माहौल कुछ देर के लिए भावुक हो गया।
भाजपा ने इस मौके पर अपने अगले बड़े अभियान का भी ऐलान कर दिया। 7 से 12 अप्रैल तक ‘गांव-बस्ती चलो’ अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत पार्टी के बड़े नेता गांव-गांव जाकर लोगों से सीधा संवाद करेंगे। हर विधानसभा में करीब 50 गांव चिन्हित किए गए हैं, जहां सिर्फ सभाएं ही नहीं होंगी, बल्कि पुराने कार्यकर्ताओं के घर जाकर उनका सम्मान भी किया जाएगा।
पार्टी ने कार्यकर्ताओं को यह भी साफ संदेश दिया है कि वे सिर्फ भाषण देने तक सीमित न रहें। उन्हें सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से मिलकर उनके अनुभव जानने हैं और उन्हें लोगों तक पहुंचाना है। साथ ही, स्वच्छता जैसे कार्यक्रमों के जरिए जमीनी स्तर पर सक्रिय भागीदारी भी दिखानी है।
कुल मिलाकर, भाजपा का यह स्थापना दिवस कार्यक्रम सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने और जनता से सीधे जुड़ने की रणनीति के रूप में नजर आया।