धार भोजशाला पर ASI की रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश, 11वीं–13वीं शताब्दी के साक्ष्यों का उल्लेख

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धार भोजशाला मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हाईकोर्ट में अपनी सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। रिपोर्ट में परिसर में 106 स्तंभ, 32 शिलालेख और विभिन्न कालखंडों से जुड़े स्थापत्य साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है।


मध्य प्रदेश के बहुचर्चित धार भोजशाला मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने अपनी विस्तृत पुरातात्विक सर्वेक्षण रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश कर दी है। रिपोर्ट में परिसर के ऐतिहासिक स्वरूप, स्थापत्य शैली और विभिन्न कालखंडों से जुड़े शिलालेखों का उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार परिसर में कुल 106 स्तंभ पाए गए हैं, जिन पर अलग-अलग प्रकार की नक्काशी और डिजाइन उकेरी गई है। इसके अलावा 32 शिलालेखों का भी दस्तावेजीकरण किया गया है। इनमें 11वीं से 13वीं शताब्दी के दौरान के साक्ष्यों का उल्लेख है, जिनमें उस समय के शासकों से संबंधित सांस्कृतिक और स्थापत्य गतिविधियों के संकेत मिलते हैं। कुछ शिलालेखों में साहित्यिक कृतियों और नाट्यांशों का भी जिक्र दर्ज है।

रिपोर्ट में 14वीं शताब्दी के दौरान मालवा क्षेत्र में मुस्लिम शासन की स्थापना से जुड़े संदर्भों का भी उल्लेख किया गया है। ऐतिहासिक अभिलेखों के आधार पर उस दौर में क्षेत्रीय सत्ता परिवर्तन और प्रशासनिक संरचना के विकास की जानकारी सामने आती है।

सर्वेक्षण के दौरान परिसर स्थित कमाल मौला मस्जिद और कमाल मौला मकबरा में कुल 56 अरबी और फारसी शिलालेखों का अध्ययन किया गया। इनमें से 43 शिलालेख स्याही से लिखे पाए गए, जिनमें आगंतुकों के विवरण, धार्मिक अभिव्यक्तियां और कुछ फारसी काव्यांश दर्ज हैं।

रिपोर्ट के अनुसार कुछ शिलालेखों पर कुरान की आयतें और एकेश्वरवाद से संबंधित धार्मिक संदेश भी अंकित हैं। इन अभिलेखों को मालवा के मध्यकालीन इतिहास और सांस्कृतिक परिवर्तनों को समझने के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में देखा जा रहा है