जनतंत्र, मध्यप्रदेश, श्रुति घुरैया:
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति का अद्वितीय केंद्र बन चुका है। प्रभु श्रीराम की दिव्यता और उनके चरित्र से जुड़ी गाथाओं को जीवंत करने के लिए अब मंदिर परिसर में दो नई विशेष प्रतिमाएँ स्थापित की जा रही हैं—एक पवित्र पक्षीराज जटायू की और दूसरी श्रीराम के सेतु निर्माण में योगदान देने वाली गिलहरी की। इन दोनों ही मूर्तियों का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है, क्योंकि ये श्रीराम के प्रति निस्वार्थ समर्पण और कर्तव्यपरायणता के प्रतीक हैं।
मंदिर निर्माण समिति की घोषणा
श्रीराम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने हाल ही में ट्रस्टी और इंजीनियरों के साथ मंदिर के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर में इन दो प्रतिमाओं को स्थापित करने के निर्णय की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि जटायू की भव्य प्रतिमा पहले ही कुबेर टीले पर स्थापित की जा चुकी है, जबकि गिलहरी की प्रतिमा भी शीघ्र ही स्थापित की जाएगी।
नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि श्रीराम मंदिर का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में है। मंदिर का शिखर अप्रैल 2025 तक पूरा होने की संभावना है, और सप्त मंदिरों की मूर्तियाँ भी शीघ्र स्थापित कर दी जाएँगी। मंदिर परिसर का विस्तार और अन्य भवनों का निर्माण कार्य 2025 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।
नृपेंद्र मिश्रा ने कहा, ‘जो भी मंदिर के भवन निर्माण हो रहे हैं, उनके बारे में मौके पर देखा गया और जैसा आप जानते हैं कि साल 2025 में मंदिर और मंदिर परिसर के जो भी निर्माण कार्य, निर्माण समिति की जिम्मेदारी है, उसको पूर्ण करने का लक्ष्य है। सभी भवन जो निर्माणाधीन हैं, वह अपने अंतिम चरण में हैं। मंदिर का निर्माण, जिसमें शिखर भी सम्मलित है, पूरी आशा है कि अप्रैल में पूरा हो जाएगा। सप्त मंदिर के बारे में भी अनुमान है कि वह भी काम पूरा हो जाएगा और वहां पर मूर्ति स्थापित हो जाएगी।’