Rajnandgaon: धर्मांतरण को लेकर मचा बवाल, ग्रामीणों को दिया जा रहा लालच, हिंदू संगठन ने विदेशी फंडिंग मिलने का लगाया आरोप

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राजनांदगांव जिले के धर्मापुर क्षेत्र में विदेशी फंड से बड़े पैमाने पर धर्मांतरण के गंभीर आरोप लगते हुए मामला गरमाया हुआ है. ग्रामीणों और हिंदू संगठनों का दावा है कि श्री डेविड चाको नामक व्यक्ति को यहां रहने के लिए जगह दी गई थी, लेकिन वह विदेशियों से फंड लेकर खुलेआम धर्मांतरण को बढ़ावा दे रहा है.

करोड़ों रुपये की लागत से बना चर्च बिल्डिंग और अनाथ आश्रम इसकी गवाही दे रहा है. आज हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस का भारी अमला स्थिति नियंत्रित करने पहुंचा.

धर्मांतरण को लेकर मचा बवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि डेविड चाको छह महीने अमेरिका और छह महीने राजनांदगांव में रहता है. जिला प्रशासन ने उसका नेहरू नगर स्थित चर्च पहले बंद कर दिया था, लेकिन अब वह धर्मापुर में इसी तरह की गतिविधियां चला रहा है. यहां संचालित अनाथ आश्रम में पिछले तीन वर्षों से 15 नाबालिग आदिवासी बच्चे गैरकानूनी ढंग से रखे गए हैं, जो सभी कांकेर जिले के उस गांव से हैं. जहां सबसे ज्यादा धर्मांतरण हो रहा है.

ग्रामीणों और हिंदू संगठनों ने लगाए आरोप

इन बच्चों को ईसाई बना दिया गया है. ग्राम सरपंच और सचिव ने स्पष्ट कहा कि डेविड चाको को केवल आवासीय प्रयोजन के लिए अनुमति दी गई थी, यदि यहां चर्च या अनाथ आश्रम चलाया जा रहा है तो यह पूरी तरह गैरकानूनी है. हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रलोभन और विदेशी धन से गरीब आदिवासी परिवारों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है. प्रदर्शनकारियों ने आयोजन स्थल का घेराव करने की कोशिश की और नारेबाजी की, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया. सूचना पर पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देश पर थाना प्रभारी सहित भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा.

पुलिस ने दोनों पक्षों से बातचीत कर समझाइश दी और स्थिति शांत कराई. किसी तरह की हिंसा नहीं हुई, लेकिन पुलिस ने आयोजनकर्ताओं से दस्तावेज मांगे और पूछताछ की. यदि शिकायत दर्ज होती है तो छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी. हिंदू संगठनों ने सरकार से सख्ती की मांग की है कि ऐसे मामलों पर निगरानी बढ़ाई जाए. दूसरी ओर, आयोजन में शामिल लोग इसे सामान्य प्रार्थना सभा बता रहे हैं. जिले में हालिया महीनों में धर्मांतरण के कई विवाद सामने आए हैं, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ा है. प्रशासन ने शांति की अपील की है और क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ा दी है। सवाल उठ रहा है कि जिला प्रशासन को इन गतिविधियों की भनक क्यों नहीं लगी?