जनतंत्र, मध्यप्रदेश, श्रुति घुरैया:
सिंगरौली बस स्टैंड पर सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात एक भीषण हादसा हुआ, जिसने सबको झकझोर कर रख दिया। आधी रात के समय जब पूरा शहर गहरी नींद में था, तब विजय ट्रैवल्स की बस में अचानक लगी आग ने एक युवा क्लीनर को जिंदा जलाकर राख कर दिया। यह हादसा आधी रात 12 बजे के करीब हुआ, जब विजय ट्रैवल्स और सिद्दीकी बस सर्विस की बसें स्टैंड पर खड़ी थीं। कुछ ही पलों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और दोनों बसें धू-धू कर जलने लगीं। इस भीषण अग्निकांड में ड्राइवर और कंडक्टर किसी तरह बच निकले, लेकिन क्लीनर हरीश पनिका आग की लपटों में घिर गया और जिंदा जलकर उसकी दर्दनाक मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही ट्रैफिक थाना प्रभारी दीपेंद्र सिंह के नेतृत्व में पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। लेकिन जब तक दमकल की गाड़ियां आग पर काबू पातीं, तब तक दोनों बसें पूरी तरह जल चुकी थीं। धुएं और आग की चपेट में आए क्लीनर हरीश की बस के अंदर ही मौत हो चुकी थी। आग इतनी भयानक थी कि किसी को उसे बचाने का मौका तक नहीं मिला। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन आग लगने के कारण का अब तक पता नहीं चल पाया है।
कैसे हुआ हादसा?
रिपोर्ट्स के अनुसार, सिंगरौली बस स्टैंड पर विजय ट्रैवल्स और सिद्दीकी बस सर्विस की बसें पास-पास खड़ी थीं। सोमवार रात करीब 12 बजे विजय ट्रैवल्स की बस में अचानक आग भड़क उठी। तेज लपटों ने कुछ ही पलों में बगल में खड़ी सिद्दीकी बस को भी अपनी चपेट में ले लिया।
उस वक्त विजय ट्रैवल्स की बस में ड्राइवर जाहिद खान, कंडक्टर काशी पटेल और क्लीनर हरीश पनिका सो रहे थे। अचानक जब आग की आंच लगी, तो काशी की नींद खुल गई। उसने देखा कि बस में चारों तरफ आग फैल चुकी थी। वह तुरंत उठकर चीखने लगा और बाहर निकलने की कोशिश करने लगा।
आनन-फानन में काशी आगे वाले दरवाजे से कूदकर बाहर आ गया, जबकि जाहिद पीछे वाले गेट से बाहर निकलने में कामयाब रहा। लेकिन हरीश बीच वाली सीट पर सोया हुआ था और घबराहट में समय रहते बाहर नहीं निकल सका। आग इतनी तेजी से फैली कि बस का पूरा ढांचा आग की भेंट चढ़ गया और हरीश भीतर ही फंसकर जिंदा जल गया। उसकी चीखें सुनाई दीं, लेकिन कोई उसे बचा नहीं सका।
24 वर्षीय हरीश पनिका छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के वाड्रफ नगर का रहने वाला था। उसकी शादी साल 2023 में हुई थी, लेकिन उसकी कोई संतान नहीं थी। अब उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
सुबह 4 बजे बुझी आग, जलकर राख हो गईं बसें
जैसे ही इस हादसे की खबर फैली, मौके पर हड़कंप मच गया। बस स्टैंड पर खड़े लोगों ने तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। कुछ ही देर में दमकल की टीमें पहुंचीं, लेकिन आग इतनी विकराल थी कि उसे बुझाने में घंटों लग गए। मंगलवार सुबह 4 बजे जाकर आग पर पूरी तरह से काबू पाया जा सका। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी—दोनों बसें पूरी तरह जलकर राख हो चुकी थीं और हरीश का शव बस के अंदर बुरी तरह झुलस चुका था।
फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आग खुद-ब-खुद लगी या फिर इसके पीछे कोई साजिश थी। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, लेकिन कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह हादसा किसी लापरवाही का नतीजा भी हो सकता है। पुलिस आसपास लगे 100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
वहीं, पुलिस की शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि घटना से पहले बस कर्मियों ने शराब पी थी। रात 9 बजे विजय ट्रैवल्स की यह बस छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से चलकर बैढ़न पहुंची थी। बस को खड़ा करने के बाद ड्राइवर जाहिद, कंडक्टर काशी और क्लीनर हरीश ने बस स्टैंड पर बैठकर शराब पी। उसके बाद हरीश ने बस को धोया और तीनों ने रात 11 बजे खाना खाया। इसके बाद वे सोने चले गए और कुछ ही देर बाद यह भीषण हादसा हो गया।