जनतंत्र, मध्यप्रदेश, श्रुति घुरैया:
भारत आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘विरासत से विकास’ की राह पर चल रहा है। ये सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अभ्युदय और वैश्विक पुनर्जागरण की ओर बढ़ता एक नया युग है। इस यात्रा में पर्यटन का योगदान अभूतपूर्व है। प्रधानमंत्री का मानना है कि पर्यटन केवल आर्थिक लाभ का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को दुनिया तक पहुँचाने का सशक्त जरिया है।
और जब पर्यटन की बात आती है तो मध्यप्रदेश – देश का ‘हृदय प्रदेश’ – सबसे आगे दिखाई देता है। यहाँ की ऐतिहासिक धरोहरें, प्राकृतिक संसाधन, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल, और लोक परंपराओं की समृद्धि इसे विश्व पर्यटन मानचित्र पर चमकाता है। यही कारण है कि एक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ने बीते वर्ष मध्यप्रदेश को दुनिया के टॉप-10 टूरिज्म डेस्टिनेशन में जगह दी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश पर्यटन ने अभूतपूर्व छलांग लगाई है। उनकी दूरदर्शी सोच ने ‘मध्यप्रदेश पर्यटन नीति 2025’ को जन्म दिया, जो सिर्फ एक डॉक्यूमेंट नहीं बल्कि पर्यटन की नई क्रांति का रोडमैप है।
यह नीति—
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पर्यटन इकोसिस्टम को मजबूती देती है
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निजी निवेश को आकर्षित करती है
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ईको-टूरिज्म, आध्यात्मिक पर्यटन और हेरिटेज कंजरवेशन के लिए अवसर खोलती है
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और प्रदेश को ग्लोबल कनेक्टिविटी की दिशा में आगे बढ़ाती है
मध्यप्रदेश की पहचान केवल स्मारकों से नहीं, बल्कि उन आयोजनों से भी है जो इसे विश्व मंच पर अलग बनाते हैं।
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खजुराहो नृत्य समारोह, तानसेन संगीत समारोह और भगोरिया उत्सव—ये केवल आयोजन नहीं, बल्कि भारत की धड़कन हैं।
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विक्रमोत्सव ने उज्जैन को वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर चमकाया है।
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भोपाल का गीता पाठ, उज्जैन का डमरू वादन और खजुराहो का कथक कुंभ तो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स तक पहुँच चुके हैं।
साथ ही, धार्मिक महत्व वाले स्थलों को नया रूप दिया जा रहा है—ओंकारेश्वर, महाकालेश्वर, चित्रकूट, संदीपनि आश्रम और दर्जनों “लोक” प्रोजेक्ट्स प्रदेश को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन का हब बना रहे हैं।
मध्यप्रदेश का पर्यटन केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है।
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ग्रामीण पर्यटन के लिए होम-स्टे योजना से गाँव सीधे पर्यटन से जुड़ रहे हैं।
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साहसिक पर्यटन में उज्जैन का स्काई-डाइविंग फेस्टिवल और पचमढ़ी-भोपाल मैराथन युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं।
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जल पर्यटन में नर्मदा पर नई परियोजनाएँ और महेश्वर की पर्यावरण-अनुकूल नावें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बना रही हैं।
स्वदेश दर्शन 2.0 और प्रसाद योजनाओं के तहत अरबों के प्रोजेक्ट्स स्वीकृत हुए। अमरकंटक, दतिया, ग्वालियर और चित्रकूट जैसे धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्रों का विकास किया जा रहा है। वहीं ओरछा और मांडू को ‘चैलेंज बेस्ड डेस्टिनेशन’ चुना गया है।
मध्यप्रदेश ने अब दुनिया भर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
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जापान के विश्व गुलाब सम्मेलन से लेकर विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों तक, इसकी सक्रिय भागीदारी रही।
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और अब 29-30 अगस्त 2025 को ग्वालियर क्षेत्रीय पर्यटन सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जहाँ नीति-निर्माता, निवेशक और उद्योगपति मिलकर भविष्य की संभावनाओं पर विचार करेंगे।
उपलब्धियों की झलक
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पर्यटक संख्या में बूम: 2022 में 3.41 करोड़ से बढ़कर 2024 में 10.70 करोड़ तक पहुँची।
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प्राकृतिक धरोहर: 11 राष्ट्रीय उद्यान, 8 टाइगर रिजर्व, 25 अभयारण्य और 785 बाघ।
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यूनेस्को का गौरव: 14 विश्व धरोहर स्थल और ग्वालियर को मिला “सिटी ऑफ़ म्यूज़िक” का दर्जा।
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निवेश और रोजगार: पर्यटन नीति 2025 के तहत 214 करोड़ का निजी निवेश और 2 लाख से अधिक रोजगार।
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फिल्म पर्यटन: 132 फिल्मों की शूटिंग ने मध्यप्रदेश को फिल्ममेकर्स का पसंदीदा लोकेशन बना दिया।
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महिला सुरक्षा: ‘महिला सुरक्षित पर्यटन स्थल’ योजना को निर्भया फंड से समर्थन।
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MICE सेंटर: भोपाल का मिंटो हॉल 99.4 करोड़ की लागत से इंटरनेशनल MICE सेंटर बना।
मध्यप्रदेश पर्यटन अब केवल “घूमने की जगह” नहीं रहा, बल्कि यह संस्कृति का संरक्षण, पर्यावरण का संतुलन और आर्थिक विकास का मजबूत आधार बन चुका है।हृदय प्रदेश सचमुच अब पर्यटन की धड़कन बनकर भारत की विरासत को वैश्विक विकास की राह दिखा रहा है।