Indore News: इंदौर के चंदन नगर थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया गया है. यह कार्रवाई आरोपी अनवर हुसैन से जुड़े मामले में कोर्ट के समक्ष गलत तथ्य प्रस्तुत करने और तथाकथित “पॉकेट गवाह” पेश करने जैसे गंभीर आरोपों के बाद की गई. इससे पहले भी इंदौर हाईकोर्ट पटेल के खिलाफ कार्रवाई के संकेत दे चुका था, लेकिन तब मामला आगे नहीं बढ़ पाया था.
अनवर हुसैन मामले में पुलिस ने दी गलत जानकारी
दरअसल, अनवर हुसैन के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर पुलिस ने अदालत में गलत जानकारी दी थी. चार मामलों की जगह उसे आठ मामलों में आरोपी बताया गया, जिसके कारण हाईकोर्ट में उसकी जमानत याचिका खारिज हो गई थी. बाद में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पुलिस ने स्वीकार किया कि एक ही नाम के दो व्यक्तियों को लेकर भ्रम हुआ और इसी वजह से यह गलती हुई. लेकिन कोर्ट ने इसे महज तकनीकी चूक मानने से इनकार कर दिया और इसे गंभीर लापरवाही करार दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने दिए लाइन अटैच के निर्देश
13 जनवरी को हुई सुनवाई में इस मामले में हस्तक्षेप करने वाले असद वारसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने बताया कि 25 नवंबर को पॉकेट गवाहों का मुद्दा उठ चुका था और मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था, इसके बावजूद 30 नवंबर को दोबारा ऐसे गवाह पेश किए गए. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई. न्यायमूर्ति एहसानुद्दीन अमानउल्ला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने शासकीय अधिवक्ता को निर्देश दिए कि वे तत्काल पुलिस कमिश्नर और राज्य सरकार को सूचित करें और टीआई पटेल को बिना किसी देरी के लाइन अटैच किया जाए. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि लिखित आदेश अपलोड होने का इंतजार किए बिना यह कार्रवाई की जाए और अगली सुनवाई तक पटेल को किसी भी थाने में कोई जिम्मेदारी न दी जाए.
पहले से दो विवादों के बाद हैं जांच के दायरे में
टीआई इंद्रमणि पटेल पहले से ही दो अलग-अलग विवादों को लेकर जांच के दायरे में रहे हैं. एक ओर उन पर सुप्रीम कोर्ट में झूठा हलफनामा देने का आरोप है, जिसके चलते विभाग के एक वरिष्ठ और साफ छवि वाले अधिकारी दिशेष अग्रवाल को भी व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होना पड़ा. वहीं दूसरा मामला चंदन नगर थाने से जुड़ा है, जहां एक रेप आरोपी के बेटे को कथित रूप से 30 घंटे से अधिक समय तक थाने में बैठाए रखने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. इस याचिका में टीआई पर द्वेषपूर्ण कार्रवाई के आरोप लगाए गए थे. हालांकि बाद में याचिकाकर्ता ने अपनी अपील वापस ले ली, लेकिन इन घटनाओं ने पुलिस विभाग की छवि पर सवाल जरूर खड़े किए.
वकील ने बताया कोर्ट ने मौखिक रूप से दिया आदेश
अनवर हुसैन की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता रितम खरे ने बताया कि फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का आदेश मौखिक रूप में दिया गया है, लेकिन कोर्ट ने साफ कर दिया है कि टीआई को लाइन अटैच किया जाना अनिवार्य है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने जो शपथपत्र दिया है, उसमें सामान्य विभागीय जांच की बात कहकर गंभीर लापरवाही को हल्का दिखाने की कोशिश की जा रही है.