जनतंत्र, मध्यप्रदेश, श्रुति घुरैया:
भारत के हृदय प्रदेश मध्यप्रदेश ने बीते कुछ वर्षों में पर्यटन के क्षेत्र में अपनी पहचान सिर्फ देश तक सीमित नहीं रखी, बल्कि वैश्विक मंच पर भी मजबूती से दर्ज कराई है। प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक धरोहर, आध्यात्मिक स्थलों और समृद्ध वन्य जीवन का अनूठा मेल आज मध्यप्रदेश को एक संपूर्ण पर्यटन राज्य के रूप में स्थापित करता है। इन्हीं संभावनाओं को दुनिया के सामने रखने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 21 जनवरी को दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के पर्यटन निवेश सत्र को संबोधित करेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकास भी, विरासत भी” के विज़न ने मध्यप्रदेश के पर्यटन मॉडल को नई दिशा दी है। राज्य सरकार ने पर्यटन को केवल भ्रमण तक सीमित न रखते हुए इसे रोजगार, निवेश और सतत विकास से जोड़ा है। इसी दृष्टिकोण का परिणाम है कि हाल के वर्षों में मध्यप्रदेश में 13.30 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंचे हैं, जो राज्य के प्रति बढ़ते भरोसे और आकर्षण को दर्शाता है।
आध्यात्मिक पर्यटन मध्यप्रदेश की सबसे मजबूत पहचान बनकर उभरा है। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में अब तक 6.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इसके अलावा खजुराहो, सांची, ओरछा, महेश्वर, अमरकंटक और चित्रकूट जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। ये स्थान न सिर्फ आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
पर्यटन को संगठित और निवेश-अनुकूल बनाने के लिए राज्य सरकार ने पर्यटन नीति-2025 और फिल्म पर्यटन नीति-2025 लागू की है। इन नीतियों के माध्यम से निवेश को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी तैयार किए जा रहे हैं। विशेष रूप से फिल्म पर्यटन नीति के तहत मध्यप्रदेश तेजी से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माताओं की पसंदीदा लोकेशन बनता जा रहा है, जिससे स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और युवाओं को काम के नए अवसर मिल रहे हैं।
ग्रामीण पर्यटन को मजबूती देने की दिशा में भी राज्य ने ठोस कदम उठाए हैं। प्रदेश के 81 गांवों में 370 से अधिक होमस्टे विकसित किए जा चुके हैं, जिन्हें भविष्य में 1000 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिल रहा है और स्थानीय लोगों को स्थायी आय के साधन उपलब्ध हो रहे हैं।
पर्यटन अवसंरचना को बेहतर बनाने के लिए हवाई और हेलीकॉप्टर सेवाओं का विस्तार भी किया गया है। पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा के तहत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, ग्वालियर, रीवा, सिंगरौली और खजुराहो को हवाई संपर्क से जोड़ा गया है। वहीं पीएम श्री पर्यटन हेली सेवा पर्यटकों को तेज़ और सुविधाजनक यात्रा का विकल्प दे रही है।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिले सम्मान भी मध्यप्रदेश की पर्यटन क्षमता को मजबूती प्रदान करते हैं। “बेस्ट टूरिज्म स्टेट ऑफ द ईयर” सहित 18 राष्ट्रीय पुरस्कार, यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में प्रदेश के चार धरोहर स्थलों का शामिल होना और देश की 69 यूनेस्को धरोहरों में से 15 का मध्यप्रदेश में स्थित होना राज्य की वैश्विक पहचान को और सशक्त करता है।
आज मध्यप्रदेश पर्यटन, परंपरा और प्रगति के संतुलन के साथ न केवल पर्यटकों, बल्कि वैश्विक निवेशकों के लिए भी तैयार है। दावोस में होने वाला यह संवाद राज्य के पर्यटन भविष्य को अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निवेश के नए अवसरों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।