जनतंत्र, मध्यप्रदेश, श्रुति घुरैया:
वीर सावरकर को लेकर दिए गए बयान ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को एक बार फिर मुश्किलों में डाल दिया है। लखनऊ हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की वह याचिका खारिज कर दी है, जिसमें उन्होंने सावरकर मानहानि केस में सेशन कोर्ट के समन आदेश और ₹200 के जुर्माने को चुनौती दी थी। अदालत ने साफ कहा कि राहुल गांधी को पहले वैकल्पिक उपाय यानी सेशन कोर्ट का दरवाजा खटखटाना होगा, न कि सीधे हाईकोर्ट में अपील करनी चाहिए थी।
यह झटका तब आया है जब 3 मार्च 2025 को लखनऊ की ACJM कोर्ट ने लगातार पेशी से गायब रहने पर राहुल गांधी पर ₹200 का जुर्माना लगाते हुए अंतिम चेतावनी दी थी। कोर्ट ने साफ निर्देश दिया था कि वह 14 अप्रैल को अदालत में हर हाल में पेश हों, वरना गैर-जमानती वारंट भी जारी किया जा सकता है। यह चेतावनी अब और भी गंभीर हो गई है, क्योंकि हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली।
क्या है मामला?
यह पूरा विवाद 17 दिसंबर 2022 को महाराष्ट्र के अकोला में राहुल गांधी द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए बयान से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर को “अंग्रेजों का नौकर” और “पेंशन लेने वाला” कहा था। इस बयान पर बवाल मच गया और लखनऊ के रहने वाले नृपेंद्र पांडेय ने राहुल गांधी के खिलाफ धारा 153A और 505 IPC के तहत मुकदमा दर्ज कराया, आरोप लगाते हुए कि “यह बयान समाज में वैमनस्य और घृणा फैलाने की मंशा से दिया गया था।” इतना ही नहीं, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वीर सावरकर को लेकर लिखे गए विवादित पर्चे भी पत्रकारों में वितरित किए गए थे।
राहुल गांधी पर पहले से चल रहे हैं अन्य मानहानि के मामले
यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी कानूनी विवादों में घिरे हैं। सुल्तानपुर की MP/MLA विशेष कोर्ट में भी राहुल गांधी पर मानहानि का एक और केस चल रहा है, जो उन्होंने 2018 में कर्नाटक चुनाव के दौरान भाजपा नेता अमित शाह पर की गई टिप्पणी के बाद दर्ज हुआ था। उस केस में राहुल को पिछले साल फरवरी में जमानत मिली थी, और जुलाई 2024 में उन्होंने कोर्ट में अपना बयान भी दर्ज कराया था।
वकील बोले— अब करेंगे अगली कानूनी रणनीति तय
राहुल गांधी की तरफ से केस लड़ रहे वकील प्रांशु अग्रवाल ने बताया कि “हमें हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली, लेकिन हम जल्द ही एक और याचिका दाखिल करेंगे। हमारा मानना है कि समन और जुर्माना दोनों अनुचित हैं।” हालांकि, इस समय स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है। यदि राहुल गांधी अगली तारीख पर कोर्ट में पेश नहीं होते, तो उन्हें न केवल गिरफ्तारी का सामना करना पड़ सकता है, बल्कि राजनीतिक नुकसान भी हो सकता है।