पशुपतिनाथ लोक से बदली मंदसौर की धार्मिक तस्वीर: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया लोकार्पण, 15 बीघा में फैला लोक बना आस्था और पर्यटन का नया केंद्र

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मंदसौर की धार्मिक पहचान को नया विस्तार देते हुए गुरुवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में विकसित किए गए भव्य पशुपतिनाथ लोक का लोकार्पण किया। शिवना नदी के पावन तट पर आकार लेने वाला यह धार्मिक-पर्यटन परिसर लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ है। लोकार्पण के साथ ही यह लोक श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आस्था, संस्कृति और सुविधाओं का संगम बनकर सामने आया है।

महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित इस कॉरिडोर में शिव परिवार की प्रतिमाएं, विशाल डमरू और धार्मिक प्रतीकों को इस तरह सजाया गया है कि प्रवेश करते ही श्रद्धालु आध्यात्मिक वातावरण से जुड़ जाएं। परिसर में घूमते हुए भक्ति और वास्तुकला का संतुलन साफ नजर आता है।

कैसे हुई पशुपतिनाथ लोक की शुरुआत

पशुपतिनाथ लोक की परिकल्पना 8 दिसंबर 2022 को मंदसौर गौरव दिवस के अवसर पर सामने आई थी। उस दिन प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मंदसौर पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संत समाज ने महाकाल लोक की तर्ज पर यहां भी एक भव्य धार्मिक कॉरिडोर विकसित करने का सुझाव रखा था।

इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने उसी समय पशुपतिनाथ लोक के निर्माण की घोषणा की। इसके लगभग एक साल बाद, 6 अक्टूबर 2023 को साधु-संतों की उपस्थिति में परियोजना का भूमि पूजन किया गया। इस कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए थे।

राजस्थान के लाल पत्थरों से सजा शिवना तट का यह लोक

शिवना नदी के किनारे लगभग 15 बीघा क्षेत्रफल में फैला यह लोक पारंपरिक स्थापत्य कला का उदाहरण है। इसके निर्माण में राजस्थान के लाल पत्थरों का उपयोग किया गया है, जिन पर पारंपरिक नक्काशी की गई है।

लोक में अयोध्या शैली से प्रेरित भव्य प्रवेश द्वार, चार अलग-अलग सुव्यवस्थित प्रवेश और निकास मार्ग बनाए गए हैं। कॉरिडोर की दीवारों पर भगवान शिव की लीलाओं और पशुपतिनाथ मंदिर के इतिहास को दर्शाती विशाल म्यूरल वॉल और पेंटिंग्स उकेरी गई हैं। रात के समय विशेष लाइटिंग के साथ ये दीवारें अलग ही दृश्य प्रस्तुत करती हैं।

यहां स्थापित 22 फीट ऊंचा त्रिनेत्र, जिसके मध्य में रुद्राक्ष विराजमान है, श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण बनकर उभरा है।

तीन राज्यों के कारीगरों की 2 साल 4 महीने की मेहनत

पशुपतिनाथ लोक को आकार देने में मध्यप्रदेश, राजस्थान और गुजरात के 100 से अधिक कारीगर और मजदूर जुड़े रहे। करीब 2 साल 4 महीने की लगातार मेहनत के बाद यह लोक तैयार हो सका।

श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परिसर में गार्डन, सरोवर, भक्ति सामग्री की दुकानें और रेस्टोरेंट विकसित किए गए हैं। इसके अलावा विशाल प्रतीक्षालय, प्राथमिक चिकित्सा कक्ष, अलग पार्किंग व्यवस्था, भोजनशाला और अतिथि विश्राम गृह भी बनाए गए हैं।

सुरक्षा व्यवस्था के लिए पूरे परिसर में अनाउंसमेंट सिस्टम और अत्याधुनिक CCTV नेटवर्क से लैस कंट्रोल रूम तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री के लोकार्पण कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी लगातार निरीक्षण करते रहे।

भगवान पशुपतिनाथ की प्राचीन प्रतिमा के संरक्षण के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की एक विशेष टीम को पश्चिम बंगाल से बुलाया गया था। टीम ने प्रतिमा पर आए स्क्रैच और क्षति की मरम्मत का कार्य पूरा किया है।

संरक्षण कार्य हाल ही में पूरा होने के कारण फिलहाल गर्भगृह में श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रखा गया है। भक्त बाहर से ही भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन कर पा रहे हैं।

इतिहासकारों के अनुसार भगवान पशुपतिनाथ की यह प्रतिमा विक्रम संवत 575 (ईस्वी सदी) की मानी जाती है। वर्ष 1940 में उदाजी धोबी को शिवना नदी में इस प्रतिमा के दर्शन हुए थे। इसके बाद यह प्रतिमा करीब 21 वर्षों तक खुले में रही।

साल 1961 में मंदिर निर्माण पूर्ण होने के बाद विधिवत रूप से प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की गई थी। आज यही प्रतिमा मंदसौर की धार्मिक पहचान का केंद्र है, और पशुपतिनाथ लोक इसके महत्व को नए आयाम दे रहा है।