जनतंत्र, मध्यप्रदेश, श्रुति घुरैया:
छोटे व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी लगाने वालों और स्वरोजगार से जुड़े मेहनतकश लोगों के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पीएम स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना को पुनर्गठित कर उसकी ऋण अवधि 31 मार्च 2030 तक बढ़ाने का फैसला लिया है। इस ऐतिहासिक फैसले का मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वागत किया और इसे छोटे व्यापारियों और मेहनतकश वेंडर्स के लिए वरदान बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना ने पहले से ही लाखों लोगों के जीवन में बदलाव लाया है और अब समयावधि बढ़ने से लाखों नए लाभार्थियों को भी स्थायी सहारा मिलेगा। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में लिए गए दूरदर्शी और जनहितकारी निर्णय बताया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश पीएम स्वनिधि योजना के क्रियान्वयन में अग्रणी राज्य है। यहां यह योजना छोटे व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी संचालकों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों के बीच लोकप्रिय हुई है।
उन्होंने कहा कि यह योजना उन लोगों के लिए विशेष सहारा है, जो अपनी जीविका के लिए छोटी पूंजी पर आधारित कारोबार करते हैं। ऋण अवधि बढ़ने से अब वे न सिर्फ कारोबार को आगे बढ़ा पाएंगे बल्कि आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा सकेंगे।
क्या बदला है योजना में?
नई व्यवस्था में कई बड़े बदलाव किए गए हैं, जिनसे स्ट्रीट वेंडर्स को सीधा फायदा मिलेगा:
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पहली किस्त का ऋण अब 10 हजार से बढ़ाकर 15 हजार रुपए कर दिया गया है।
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दूसरी किस्त में भी बढ़ोतरी हुई है, अब 20 हजार की जगह 25 हजार रुपए मिलेंगे।
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तीसरी किस्त पहले की तरह 50 हजार रुपए पर ही बनी रहेगी।
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यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड शुरू किया जा रहा है, जिससे रेहड़ी-पटरी वाले किसी भी समय तुरंत ऋण सुविधा ले सकेंगे।
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डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए 1600 रुपए तक का कैशबैक प्रोत्साहन भी मिलेगा।
योजना का कुल बजट 7,332 करोड़ रुपए तय किया गया है और इसका लक्ष्य है 1 करोड़ 15 लाख लाभार्थियों तक पहुँचना। इसमें से 50 लाख लोग नए होंगे।
कस्बों से पेरी-शहरी क्षेत्रों तक
अब तक यह योजना मुख्य रूप से वैधानिक कस्बों में चल रही थी। लेकिन पुनर्गठन के बाद इसका दायरा बढ़ाकर जनगणना कस्बों और पेरी-शहरी क्षेत्रों तक किया जा रहा है। इसका मतलब है कि अब छोटे कस्बों और शहरों के आसपास रहने वाले लाखों लोग भी इससे जुड़ पाएंगे।
क्यों खास है यह योजना?
कोविड-19 महामारी के समय जब देशभर के रेहड़ी-पटरी वाले और छोटे दुकानदार कठिनाइयों से जूझ रहे थे, तब जून 2020 में यह योजना शुरू की गई थी। तब से अब तक इसका असर साफ दिखता है। जुलाई 2024 तक 68 लाख से अधिक वेंडर्स को 13,797 करोड़ रुपए के ऋण वितरित किए जा चुके हैं और करीब 96 लाख लोन प्रकरणों को मंजूरी मिली है।
मध्यप्रदेश शुरुआत से ही इस योजना में आगे रहा है। यहाँ बड़ी संख्या में स्ट्रीट वेंडर्स ने इस योजना का लाभ उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि नई समय-सीमा और अतिरिक्त सुविधाओं से प्रदेश के छोटे व्यापारियों को आत्मनिर्भर बनने का और बड़ा मौका मिलेगा।